Connect with us

IND Editorial

आग लगाते ओबीसी आरक्षण के अंगारे…

Published

on

Share Post:

ना काहू से बैर/राघवेंद्र सिंह

आमतौर से मध्य प्रदेश की तासीर शांति और समन्वय की है। इसलिए इसे शांति का टापू माना जाता है। कभी-कभी अंडरवर्ल्ड और आतंकवाद के मुद्दे पर इसके तार जुड़ने की वजह से अलबत्ता सुर्खियों में आता है। लेकिन इन दिनों यह सूबा अपने मिजाज से कुछ अलहदा ओबीसी आरक्षण को लेकर आग सी उगलता दिख रहा है। पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण का धुंआ उठना शुरू हुआ। इसे लेकर सियासती दलों ने 50 फीसदी से अधिक आरक्षण के लिए अदालतों में याचिकाओं की चिंगारी लगानी शुरू की। कानूनी और संवैधानिक जटिलताओं के चलते बतौर चेतावनी अदालत ने कहा आग से मत खेलो… सबको पता है प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने सात अगस्त 1990 को मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की थी। इसके बाद देश ने हिंसा का भयावह दौर देखा था। बाद में वीपी सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई थी। उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और नए प्रधानमंत्री के रूप में चन्द्रशेखर ने उपद्रव और हिंसा में डूबे देश को संभाला था। आने के शायद कोई भी जिम्मेदार नागरिक और दल फिर उस तरह के दिन देखने के लिए तैयार हो।
प्रदेश सरकार ने चुनाव तो रोक दिए लेकिन इससे लगी चिंगारी आंदोलन के कारण छावनी में बने भोपाल में रविवार को अंगारे में तब्दील होती दिखी। इसके अंगारों को उछालने के लिए आंदोलन की आग भड़काने की साजिशें भी हो रही हैं। शोलों को हवा देने के लिए बयानों का सिलसिला भी चल पड़ा है। आने वाले दिनों में कांग्रेस – भाजपा इसमें बढ़चढ़ हिस्सा लेते हुए भी दिखेंगी। संडे को इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। “सरकार ओबीसी आंदोलन को कुचल रही है” ऐसा कह कर पूर्व सीएम कमलनाथ मैदान में आ चुके हैं। जबाव में नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि “कांग्रेस ओबीसी आरक्षण की आड़ में प्रदेश का माहौल खराब कर रही है”।
अभी तो यह आरम्भ है, दोनों ही दलों से बड़े नेताओं का आना शेष है। राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए आग लगाने का काम किया जा रहा है। ऐसा लगता है रणनीति के हिसाब से सब तय कर रखा है कौन आग लगाएगा और कब पानी डाला जाएगा।

महासभा तीसरा मोर्चा बनाकर लड़ेगा चुनाव:

Advertisement

ओबीसी महासभा तीसरा मोर्चा तैयार कर रही है। यह मोर्चा 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। यह खुलासा ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय महासचिव तुलसीराम पटेल ने किया। उन्होंने कहा कि सांसद-विधायक कोई सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। इस वर्ग के जनप्रतिनिधि सिर्फ वोट के लिए अपने आप को ओबीसी वर्ग का बताते हैं। हम अब जिलों में आंदोलन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि शासन-प्रशासन कब तक रोकेगा, देखते हैं।
इस वर्ग के जनप्रतिनिधि सिर्फ वोट के लिए अपने आप को ओबीसी वर्ग का बताते हैं। हम अब जिलों में आंदोलन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि शासन-प्रशासन कब तक रोकेगा, देखते हैं। जिलों में कार्यकर्ताओं को भोपाल आने से पुलिस ने रोक दिया। जो भोपाल तक पहुंच गए, उन्हें हिरासत में लिया गया।
पटेल ने कहा कि हम शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपनी मांगों के संबंध में ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने पदाधिकारियों को शनिवार को ही नजरबंद कर दिया। जिलों में कार्यकर्ताओं को भोपाल आने से पुलिस ने रोक दिया। जो भोपाल तक पहुंच गए, उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है। पटेल ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस मारपीट कर रही है।
महासभा की मांग…
नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में 52% आबादी के हिसाब से आरक्षण दिया जाए। ओबीसी की जनगणना 1971 के बाद अब तक नहीं की गई है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश में 65 और देश में 85% आबादी ओबीसी है। केंद्र सरकार कहती है कि 27% आरक्षण दे रहे हैं। राज्य सरकार कह रही है कि 14% इस वर्ग को दिया जा रहा है, लेकिन सच यह है कि 8% आरक्षण भी नहीं दिया जा रहा है।

महासभा के कहना है कि जयस और भीम आर्मी हमारे छोटे भाई
जयस और भीम आर्मी के समर्थन पर ओबीसी महासभा के महासचिव ने कहा कि दोनों संगठन हमारे छोटे भाई हैं। दोनों संगठनों के पदाधिकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उन्होंने कहा कि महासभा के लगभग सभी पदाधिकारियों को पुलिस ने नजरबंद कर दिया है।

कांग्रेस के इशारे पर हो रहा सब कुछ: मंत्री भूपेंद्र सिंह
ओबीसी महासभा के आंदोलन को लेकर मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि ओबीसी को लेकर लोग राजनीति कर रहे हैं। दूसरे संगठनों को जोड़कर प्रदेश का वातावरण खराब करना यह कांग्रेस के इशारे पर हो रहा है। मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया। ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण मिले इसके लिए प्रदेश सरकार की तरफ से देश के बड़े वकील हरीश साल्वे पैरवी करेंगे।

Advertisement

बॉक्स
कांग्रेस ने गिरफ्तारी की निंदा
सीएम हाउस के घेराव के लिए भोपाल में जुटे ओबीसी महासंघ के पदाधिकारियों की गिरफ्तारी की कांग्रेस ने निंदा की है। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और प्रदेश कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष रामनिवास रावत ने कहा कि बीजेपी सरकार ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने जा रहे पिछड़ा वर्ग संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ जो कार्रवाई की है, वह आपत्तिजनक है। लोकतंत्र में सबको बात रखने का अधिकार है। वे ओबीसी आरक्षण को लेकर संगठन अपनी बात रखने जा रहे थे। इसमें कुछ भी असंवैधानिक नहीं था। ऐसे में सरकार द्वारा की गई कार्रवाई निंदनीय है।

गौरतलब है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव पर रोक लगा दी गई है। मतलब ये है कि 6 जनवरी से शुरू होने वाले पंचायत चुनाव फिलहाल नहीं होंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आखिरकार राज्य सरकार को पीछे हटी और चुनाव पर रोक लगाने का फैसला लेना पड़ा। शिवराज सिंह चौहान कैबिनेट ने पंचायत चुनाव पर रोक को लेकर पेश हुए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय भोपाल जिला पंचायत के अध्यक्ष कांग्रेस नेता मनमोहन नागर की याचिका पर आया था। मनमोहन नागर ने अदालत में कहा था कि प्रदेश में भाजपा सरकार ने पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण रोटेशन और परिसीमन पर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा में बगैर ओबीसी के आरक्षण के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नहीं कराए जाने का संकल्प सर्वसम्मति से पारित भी किया गया था। राज्य की त्रि-स्तरीय पंचायत के चुनाव के लिए अगले साल छह जनवरी, 28 जनवरी और 16 फरवरी को मतदान तीन चरणों में होने थे, लेकिन 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश निर्वाचन आयाग को स्थानीय निकाय में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव प्रक्रिया रोकने और उन सीटों को सामान्य वर्ग के लिए फिर से अधिसूचित करने का निर्दश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय भोपाल जिला पंचायत के अध्यक्ष कांग्रेस नेता मनमोहन नागर की याचिका पर आया था। नागर ने अदालत में कहा था कि मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार ने पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण रोटेशन और परिसीमन पर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा में बगैर ओबीसी के आरक्षण के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नहीं कराए जाने का संकल्प सर्वसम्मति से पारित भी किया गया।

Advertisement

यह था आदेश…
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अजय मानिकराव खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने कहा- “मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की अधिसूचना में ओबीसी के लिए 27% सीटों को आरक्षित रखा गया है। यह आरक्षण महाराष्ट्र के संबंध में हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है। हम राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश देते हैं कि वह सभी स्थानीय निकायों में ओबीसी सीटों के लिए आरक्षित चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाए। उन सीटों को सामान्य वर्ग के लिए दोबारा नोटिफाई किया जाए।” इसके चलते मध्य प्रदेश सरकार ने चुनाव रोक दिए।

बॉक्स
अदालत ने आयोग को लगाई थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राज्य निर्वाचन आयोग से कहा था कि आप तत्काल अपनी गलती सुधारिए। सरकार आपसे क्या कह रही है, यह मत सुनो। कानून जो कहता है, वह करो। अगर चुनाव संविधान के अनुसार हो रहे हैं, तो कराइए। हम चाहते हैं कि टैक्सपेयर्स के पैसे का नुकसान न हो। हम नहीं चाहते कि राज्य निर्वाचन आयोग किसी और के कहने पर कुछ भी करे। हम इस मामले में और ज्यादा कंफ्यूजन नहीं चाहते। अगर चुनाव कराए, तो जनता का पैसा बर्बाद भी हो सकता है। आप उसकी चिंता करें।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था – आग से न खेलें
पंचायत चुनाव के लिए जारी नोटिफिकेशन पर नाराजगी व्यक्त करते हुए बेंच ने राज्य निर्वाचन आयोग से यह भी कह दिया कि प्लीज, आग से न खेलें। आपको इस परिस्थिति को समझना चाहिए। राजनीतिक प्रतिबद्धताओं के आधार पर फैसले मत लीजिए। हर राज्य का पैटर्न अलग है। रभारत का सिर्फ एक ही संविधान है और अब तक एक ही सुप्रीम कोर्ट है। हम नहीं चाहते कि मध्य प्रदेश में कोई भी प्रयोग हो और महाराष्ट्र जैसा फैसला वहां भी आए। तब जनता का पैसा बर्बाद होगा।

Advertisement

बॉक्स
चन्द्रशेखर गिरफ्तार…
ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे प्रदर्शन को लेकर पुलिस खासी सतर्क रही। इससे पहले रेलवे स्टेशन और बसों में चेकिंग चलती रही। महासभा का दावा है कि भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को पुलिस ने एयरपोर्ट से हिरासत में लिया है। महासभा का दावा है कि भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर को पुलिस ने एयरपोर्ट से हिरासत में लिया था। बाद में चंद्रशेखर रात 10 बजे फ्लाइट से दिल्ली रवाना हो गए।

Share Post:
Continue Reading
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Address : IND24, Plot No. 35, Indira Press Complex,
MP Nagar, Zone – 1, Bhopal (MP) 462011

Copyright © 2021 Ind 24 News Channel.