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IND Editorial

चने खाने वाले कार्यकर्ताओं को रसमलाई कब…

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मोदी के बहाने मप्र में भाजपा एक्टिव मोड पर …

राघवेंद्र सिंह

भाजपा केंद्रीय नेतृत्वअर्थात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आमित शाह ने 2023 चुनाव में 51 प्रतिशत वोट पाने के लिए पार्टी में कसावट लाना शुरू कर दिया है। लेकिन 2003 जब से भाजपा प्रदेश की सत्ता में आई तब से अब तक चने खा कर काम करने वाले कितने कार्यकर्ताओं को सत्ता में भागीदारी मिली और उसके बाद वाले कितने सत्ता की रसमलाई में डुबकियां लगा रहे हैं। इस तरह के सवालों का जितने जल्दी समाधान होगा उतनी शीघ्रता से असंतोष का रोना धोना कम होगा। इन्ही प्रश्नों के बीच 51 फीसदी वोट पाने का टास्क पूरा करना कठिन होगा। अब पार्टी बैठक, भोजन और विश्राम से आगे निकलकर संसदीय व विधानसभाई क्षेत्र से लेकर पंचायत स्तर तक जल्द ही कार्यकर्ता और मतदाताओं से संपर्क और संवाद करेगी। आगे चलकर इसमें नाराज़ ,असंतुष्ट और दुखी कार्यकर्ताओं को मनाने का काम भी मिशन के तौर पर किया जाएगा। इसके लिए संगठन व सरकार में खाली पड़े निगम मंडलों के पदों पर नियुक्ति सबसे ज्यादा जरूरी है। इसका समाधान जितने जल्दी होगा मुश्किलें उतनी आसान होती दिखेंगी।
बहरहाल, मध्यप्रदेश की राजनीति लम्बे समय बाद करवट लेती नजर आ रही है। अट्ठारह साल में सम्भवतः पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि भाजपा जबरदस्त एक्टिव मोड पर है। प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक, विधायकों से सीधा संवाद, सम्भागीय बैठकें, जिला- मंडल तक के कार्यकर्ताओं की चर्चा। चुनाव जीतने के लिए टारगेट और टिप्स तय कर लिए हैं।
कई महीनों से खदबदा रही सूबे की सियासत में उबाल के साथ उफान आ रहे हैं। मौका था जनजातीय संम्मेलन के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन आदिवासी रानी कमलापति के नाम करने का। इसके बाद तो प्रधानमंत्री मोदी से लेकर प्रदेश के प्रभारी शिवप्रकाश, राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष और मुरलीधर राव के आने से सब हैरान है। यह सब कैसे और क्यों हुआ ? इसके पीछे लम्बी कहानी है। विभिन्न स्तर से जो फीडबैक दिल्ली दरबार को मिल रहा था वह बेहद चिंताजनक था। दीर्घकाल के पश्चात भाजपा में दिल्ली से भेजे गए नेता शिव प्रकाश ने मंडल तक के दौरे कर भाजपा की नब्ज टटोलने की कोशिश की उसके बाद भाजपा संगठन की दृष्टि से पुराने तेवर की तरफ लौटने की तैयारी में जुटती प्रतीत हुई। कार्यसमिति की बैठक,सम्मेलन, प्रशिक्षण, टारगेट – टिप्स ये सब सियासी टोने टोटके हैं। जो पार्टी की सक्रियता में इजाफा करने के लिए गंडे ताबीज के रूप में काम करेंगे। इसे संगठन को पितृ पुरुष कुशाभाऊ ठाकरे के कालचक्र में लाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। इसके चलते मिंटो हॉल का नाम कुशाभाऊ ठाकरे रखना भी कार्यकर्तओं को जगाने का हिस्सा समझा जाए तो हैरत नही होगी। भाजपा में आम चुनाव 2023 की तिकड़म शुरू हो चुकी है। बाइस प्रतिशत जनजातीय वोट को लुभाने के लिए मोदी जी आदिवासी रानी कमलापति के जरिए इसका आगाज कर चुके हैं। मजे की बात यह कि भाजपा के धूमधड़ाके ने कांग्रेस को भी सोते से हड़बड़ी में सही जगाने का काम किया है।

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असंतुष्टों को मनाना भी चुनौती होगा
भाजपा में जिस स्पीड से पीढ़ी बदलाव हुआ है उसने के दिग्गजों को दुखी और बाजी पलटने का माद्दा रखने वालों को असंतुष्ट कर दिया है। असंतोष का शमन करना टेढ़ी खीर होगा। कह सकते हैं इस मामले में प्रदेश नेतृत्व की काबिलियत कसौटी पर कसी जाएगी। दमोह उपचुनाव की बड़ी हार इस बात का पहले ही संकेत दे चुकी है की अगर नए के साथ पुराने लोगों को साध कर संगठन व चुनाव के काम पर नही लगाया तो आम चुनाव में के जगह ” दमोह ” जैसे नतीजे देखने को मिल सकते हैं।
बुंदेलखंड में पिछड़े वर्ग की बुज़ुर्ग महिला नेता पूर्व मंत्री कुसुम महदेल ने ट्वीट करके जो असंतोष जताया है वह पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। “उन्होंने लिखा है हैम 1980 से भाजपा के कार्यकर्ता ज़रूर हैं ,पर भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल नही हैं। उपेक्षित पिछड़ा जाती से हूँ ,गरीबों की मदद जरूर करती हूँ, यही हमारा गुनाह है। ” उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को निशाने पर लेते हुए कहा भिंड के वीडी शर्मा हमारे सांसद हैं। वे यहीं नही रुकती, आगे लिखती हैं जिसको कहीं जगह नही मिलती, उसको पन्ना भेज दिया जाता है। दुख ,असंतोष और गुस्से का इसे एक बड़ा उदाहरण माना जा सकता है। ऐसे नेताओं की संख्या सैकड़ों में हो सकती है। चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान इन्हें मनाना नामुमकिन भले ही न हो मुश्किल जरूर होगा। इसके लिए नेतृत्व को आप कद और दिल बड़ा करना पड़ेगा। कठिन काम है लेकिन भाजपा के नेताओं ने ऐसा कई बार किया है। आने वाला समय नेताओं के लिए समझ और संजीदगी बढ़ाने के मामले में आग के दरिये में डूबकर जाने जैसा होगा।

दिग्विजय सिंह ने शुरू कर दिया है मिशन
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस को अगले चुनाव हेतु तैयार करने का मिशन शुरू कर दिया है। वे प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। जगह जगह प्रभात फेरी निकालकर लोगों को जगाने और सक्रिय करने का काम कर रहे हैं। यह तब हो रहा है जब भाजपा मैदानी मोर्चे पर कमर कसने के लिए बैठक और प्रशिक्षण के काम में लगी है। कांग्रेस में दिग्विजय सिंह अकेले ही सवा लाख से एक लड़ाऊं की नीति पर चल रहे हैं। पिछले चुनाव में भी उन्होंने नर्मदा-परिक्रमा और उसके बाद पंगत में संगत जैसी योजना पर काम कर कांग्रेस को सबसे बड़ी पार्टी बना कमलनाथ की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। अभी वे गांधीवाद को आगे रख भाजपा को चुनौती दे रहे हैं। कांग्रेसी के घुटने तोड़ देने संबंधी भाषण पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के घर रामधुन का कीर्तन भी इसी का हिस्सा है।

कमलनाथ भी चेम्बर से बाहर निकले
चेम्बर पॉलिटिक्स के उस्ताद कमलनाथ को भी कमरे निकल बैठक से लेकर सभाएं तक करने को विवश कर दिया है। कुलमिलाकर प्रदेश की राजनीति में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस ने भी मोर्चा सम्भाल लिया है। आने वाले दिनों में मुकाबला दिलचस्प होगा। इसमें मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर सबकी नजर रहेगी।

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