Connect with us

Health & wellness

दूसरों की राय और फैसलों पर निर्भर होने से बचें

Published

on

जीवनशैली। हर बात पर दूसरों की राय और फैसले लेने की निर्भरता आपके लिए भविष्य में नुकसानदायक साबित हो सकती है, समय रहते इस आदत से दूरी बना लेना ही बेहतर है

  • कुछ लोग दूसरों की राय के आधार पर जीते हैं उनके द्वारा बताए गए रास्ते सही मानकर अपना कदम उठाते हैं। जो कि आगे चलकर उनकी स्वतंत्र सोच को प्रभावित करके निर्भरता को बढ़ाता है।अगर आपनें भी आदत है तो यकीन मानिए आप अपने जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों की डोर किसी और के हाथों में सौंप रहे हैं। जो आपके लिए नुकसान दायक दो सकता है।
  • अपनी कोई राय ना बनाकर, केवल दूसरों की राय पर चलने की आदत से समय रहते दूर हो जाएं। नहीं तो आप दूसरों पर निर्भर हो जाएंगे।

हर व्यक्ति किसी न किसी कारण के चलते एक दूसरे पर थोड़ा बहुत निर्भर हो सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं जिन्हें अपनी हर राय बनाने से पहले दूसरों से एक प्रकार की स्वीकृति चाहिए होती है। ऐसे व्यक्तियों को अपने निजी या सामाजिक जीवन में खुद फैसले लेने में समस्या आती है। ऐसे व्यक्ति दूसरों की राय पर ही अपने फैसले ले पाते है। ये आदत नुकसानदायक होती है कि ये लोग सदा के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसे लोग अपनी कोई राय कभी भी नहीं बना पाते। ऐसे व्यक्तियों को असफल होने या किसी गलती के होने का डर इतना सताता है कि ये अपना आत्मविश्वास खो बैठते हैं।

अपनी इस आदत से कैसे परिवर्तन कर सकते है, जानिए

कभी-कभी ऐसे पल आते हैं जब आम जीवन में कोई व्यक्ति निर्णय लेने में अपने आप को  असमर्थ पाता है या कभी किसी निर्णय को लेने में घबराया हुआ होता है जब उसे किसी अन्य व्यक्ति की राय लेने की जरुरत लगती है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व ही दूसरों की राय पर टिका हो तो निश्चित रूप से समस्या वाली बात है। अमूमन ऐसे लोग डीपीडी (डिपेंडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर) का शिकार हो सकते हैं। इसकी पुष्टि केवल मनोचिकित्सक ही कर सकते हैं। लेकिन इसके बारे में मौलिक जानकारी होना भी जरूरी है।

Should You See The Same Therapist As Your Friend Or Relative? | HuffPost  Life

क्या है डीपीडी(डिपेंडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर)
ये एक प्रकार का अकेले रहने की असमर्थता का डिसऑर्डर है। ऐसे लोग हर बात पर दूसरों की सलाह पर तो निर्भर रहते ही हैं, साथ-साथ दूसरों के आस-पास या साथ न होने से ही एक प्रकार की एंग्जायटी और असुरक्षा का भाव महसूस करते हैं। यदि वे कोई निर्णय ले भी लें तो एक बार किसी अन्य व्यक्ति की सहमति के बाद ही आश्वस्त महसूस करते हैं।
ऐसे लोगों में असहमतियों का डर होता है।अकेले छोड़ दिए जाने का डर।असहमतियों से तुरंत आहत होने का भी कभी-कभी इन्हे परेशानी में डाल सकता है।लगातार एंग्जायटी, तनाव जैसे तमाम लक्षण भी इनमें देखे जा सकते हैं।

डीपीडी(डिपेंडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर) के कारण
हालांकि इसके सटीक कारणों के बारे में नहीं कहा जा सकता, लेकिन अतीत के कड़वे अनुभव, लम्बे समय तक अपमानजनक व्यवहार की स्थिति में रहना,  अभिभावकों का बचपन से ओवरप्रोटेक्टिव व्यवहार यानी अतिसंरक्षित व्यवहार, प्रताड़ना-भरे संबंधों का लम्बा अनुभव इसके कारणों में शामिल हैं।

Advertisement

क्या है इलाज
मनोचिकित्सक ऐसे मरीज़ की हिस्ट्री के अध्ययन और लक्षणों के आधार पर डायग्नोज करते हैं और रोग की गंभीरता के अनुसार ही इसका इलाज करना तय किया जाता हैं। थैरेपी के जरिए इसका समाधान निकाला जा करता हैं। लेकिन सबसे जरूरी है कि इसे सही समय पर पहचानना और इलाज शुरू हो जाए।  नहीं तो से समस्या हमेशा के लिए बनी रह सकती है, और वक्त के साथ-साथ ये गंभीर भी हो सकती है।

 

 

Share Post:
Address : IND24, Plot No. 35, Indira Press Complex,
MP Nagar, Zone – 1, Bhopal (MP) 462023

Copyright © 2021 Ind 24 News Channel. Website Design & Developed By Shreeji Infotek