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जन्माष्टमी : कृष्ण जनम भयो, आज बधावा लेके आए !

By: Raaj Sharma | Created At: 06 September 2023 06:41 PM


समस्त दुनियां को आनंद देने वाले ‘श्री कृष्ण’ जिनके पैदा होने पर गाया गया कि ‘नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की’ जिन्होंने बचपन से ही लोगों के दुखों को दूर किया फ़िर चाहे बचपन में पूतना, कालिया नाग, या कंस के अत्याचारों से हो या बाद में महाभारत के रूप में अधर्म पर धर्म को जीत दिलाना हो, दुनियां की समस्त सिद्धियां और इन्द्रियां जिनके वश में हैं, जो स्वयं योगिराज हैं और सम्पूर्ण सामर्थ्य और सुदर्शन जैसी शक्ति जिनके पास है, इसके बावजूद खुद पर तमाम आरोप और अपशब्द सुनने के बाद भी गहरे धैर्य में धरा के समान शांत रहना और हर स्थिति में मुस्कुराना श्री कृष्ण की महानता और उनके चरित्र का परिचय देती है.

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भगवान श्रीकृष्ण जी की पूजा न सिर्फ देश में बल्कि सात समंदर पार तक होती है. कान्हा की इसी पूजा से जुड़ा पर्व है जन्माष्टमी, जिसे हर साल भाद्रपद मास की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार इस पावन तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े तीर्थ स्थानों पर जाकर दर्शन और पूजन करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. भारत में श्रीकृष्ण के बहुत से प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनकी अपनी एक अलग ही विशेषता है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण जहां-जहां भी रहे वे सभी पावन तीर्थ बन गए. आइए देश के प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों के बार में विस्तार से जानते हैं.

जन्माष्टमी के पर्व पर भगवान श्रीकृष्ण जी के बाल स्वरूप की पूजा करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार कान्हा की पूजा में कुछेक चीजों को शामिल करना जरूरी माना गया है, जिसके न होने पर कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा अधूरी मानी जाती है.

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1. वस्त्र

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन हरे, पीले, लाल एवं मोरपंख से बने वस्त्र, फूलों वाले वस्त्र, जरदोरी आदि जैसे वस्त्र लड्डू गोपाल को पहनाने चाहिए ऐसा करने से कान्हा आपसे प्रसन्न होंगे.

2. बांसुरी

बांसुरी कान्हा की अत्यंत प्रिय वस्तु मानी गयी है. कहा जाता है कि इसके बिना कान्हा जी का श्रृंगार अधूरा है. बांसुरी को सरलता और मिठास का प्रतीक माना जाता है इसलिए कृष्ण जन्माष्टमी पर छोटी सी बांसुरी कान्हा के हाथों में अवश्य रखें. बांसुरी घर में रखने से मां लक्ष्मी आकर्षित होकर घर में प्रवेश करती हैं.

3. मोर मुकुट

मोर पंख के बिना श्रीकृष्ण का श्रृंगार अधूरा माना जाता है. श्रीकृष्ण को मोरपंख सबसे होता है. मोर मुकट भव्यता और सम्मोहन का प्रतीक है. यह दुखों को दूर करके जीवन में खुशहाली लाता है. इसलिए जन्माष्टमी के अवसर पर कृष्ण मूर्ति पर मोर मुकुट जरूर लगाएं. ऐसा करने पर कान्हा जी प्रसन्न होकर आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं.

4. माला

जन्माष्टमी के पर्व पर श्रीकृष्ण और लड्डू गोपाल को विशेष रूप से वैजयंती की माला या मोतियों की माला पहनाएं. कान्हा जी को चाहें तो लाल या पीले फूलों की बनी माला भी पहना सकते हैं. घर में वैयजंती की माला रखना बहुत शुभ माना गया है. पूजा के समय कान्हा जी को वैजयंती की माला जरुर पहनाएं.

5. माखन

माना जाता है कि कृष्ण जी को और लड्डू गोपाल को माखन अत्यंत प्रिय है. यदि कोई भक्त जन्माष्टमी के पर्व पर लड्डू गोपाल को माखन और मिश्री का भोग लगाता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. माखन का भोग लगाने के बाद लोगों में भी बांटना चाहिए.

6. टीका

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बाल लड्डू गोपाल के माथे पर रोली एवं चंदन का टीका अवश्य लगाना चाहिए जिससे आपके जीवन में मधुरता आएगी और आप सुख-समृद्धि का जीवन व्यतीत करेंगे.

7. बाजूबंध और कड़े

कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल का पूजा के समय सोने या चांदी के कड़े से श्रृंगार करने से जीवन में आ रही बधाएं दूर होती हैं और आप कठिनाओं से मुक्त हो जाएंगे.

8. कुंडल

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कन्हैया जी के कानों में सोने, चांदी या मोती से बने हुए कुंडल अवश्य पहनाएं, इससे वे प्रसन्न होते हैं.

9. पाजेब और कमरबंध

श्री कृष्ण की कृपा पाने के लिए चांदी से बनी पायल या पाजेब बाल गोपाल के दोनों चरणों में जरूर पहनाएं और साथ ही कमर में कमरबंध पहनाना न भूलें.

10. झूला

जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण बाल स्वरूप में प्रकट होते हैं इसलिए उन्हें झूले या पालने में झुलाया जाता है. जन्माष्टमी पर पूजा में छोटा पालना या झूला जरूर रखें. ऐसा करने से परिवार में खुशहाली आती है.

11. घी और घंटी

जन्माष्टमी के दिन पूजा करते समय शुद्ध घी जरूर शामिल करें और साथ ही ध्यान रहे कि घी गाय का ही हो क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण गाय से बहुत लगाव रखते थे. ऐसा करने से व्यापार या नौकरी की सभी समस्याएं दूर होंगी. आप श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने हेतु पूजा में घंटी भी रख सकते हैं. घंटी की ध्वनि से घर की नकारात्मकता दूर होती है. banner

हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व का विशेष माना गया है. यह कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस साल यह पर्व 6 सितंबर 2023 को मनाया जाएगा. यह पर्व कृष्ण भक्तों के द्वारा देश-दुनिया में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. इस दिन श्रीकृष्ण के भक्त व्रत रखते हैं और मंदिर भगवान कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना करते है. हिंदू धर्म में मान्यता है कि श्रीकृष्ण का जन्म मध्य रात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी पर कृष्ण जी की पूजा रात में ही की जाती है.

सनातन धर्म की मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति कृष्ण जन्माष्टमी के दिन व्रत रखता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. भगवान श्रीकृष्ण को दही-दूध और मक्खन विशेषरुप से पसंद है, इसलिए दही का चरणामृत बनाकर लोगों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है. अगर आप भी कृष्ण जन्मोत्सव मनाने जा रहे हैं, तो आपको पूजा में कुछ सामग्री को जरूर शामिल करना चाहिए जिनसे भगवान श्रीकृष्ण और लड्डू गोपाल प्रसन्न होते हैं.

जन्माष्टमी में श्री कृष्ण को चढ़ाए जाने वाला प्रसाद –

जन्माष्टमी के उत्सव पर भगवान श्रीकृष्ण को कई तरह के पकवानों के भोग लगाए जाते हैं जिसमें से एक है धनिया पंजीरी जो जन्माष्टमी का मुख्य प्रसाद है। भगवान श्रीकृष्ण को सिर्फ माखन-मिश्री ही अतिप्रिय नहीं बल्कि धनिया पंजीरी भी उन्हें बहुत पसंद है.

श्री कृष्ण की मूर्ति से जुड़े नियम-क़ायदे –

हिंदू मान्यता के अनुसार यदि आपके घर में भगवान विष्णु या फिर उनके अवतार कृष्ण की मूति हो या फिर आपके घर में शालिग्राम हो तो आपको प्रतिदिन स्नान-ध्यान करने के बाद उनकी पूजा गाय के दूध से बने शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए. इसके साथ भगवान को प्रतिदिन भोग लगाने के बाद ही खुद भोजन ग्रहण करना चाहिए। ध्यान रहे कि भगवान को भोग हमेशा तुलसी दल के साथ ही लगाना चाहिए, क्योंकि इसके बगैर भगवान कृष्ण आपका भोग स्वीकार नहीं करते हैं। भगवान कृष्ण की पूजा में साफ-सफाई और पवित्रता का पूरा ध्यान रखना चाहिए, अन्यथा पुण्य की जगह पाप लगने की आशंका बनी रहती है.

कृष्ण जी की कुछ मूर्तियों से जुडी मान्यताएं –

हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। मान्यता है कि सच्चे मन से मुरली मनोहर की पूजा करने करने वाले भक्त पर कान्हा की पूरी कृपा बरसती है और उसकी परेशानी को दूर करने के लिए वे दौड़े चले आते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा तो आप कभी भी कर सकते हैं लेकिन जन्माष्टमी के पर्व पर उनकी पूजा का ज्यादा महत्व माना गया है। आइए जानते हैं कि कान्हा के जन्मोत्सव पर उनकी किस मूर्ति की पूजा करने पर आखिर किस फल की प्राप्ति होती है.

लड्डू गोपाल की मूर्ति –

banner जन्माष्टमी के पावन पर्व पर अधिकांश लोग उनके बाल स्वरूप यानि लड्डू गोपाल के रूप में पूजना ज्यादा पसंद करते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के इस पावन स्वरूप की पूजा दुर्भाग्य को दूर करे सौभाग्य को बढ़ाने वाला माना गया है। साथ ही साथ लड्डू गोपाल की पूजा संतान सुख भी दिलाती है। यही कारण है कि हर कोई बाल-गोपाल की मूर्ति को पूजना अधिक पसंद करता है।

गोवर्धन पर्वत उठाते हुए कृष्ण की मूर्ति –

banner हिंदू मान्यता में भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न प्रकार की मूर्तियों में गोवर्धन पर्वत को उठाए वाली प्रतिमा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। हिंदू मान्यता के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को जीवन में किसी भी प्रकार का भय हो या फिर किसी बड़ी समस्या ने परेशान कर रखा हो तो उसे दूर करने के लिए जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन पर्वत उठाए हुई प्रतिमा की विशेष पूजा करनी चाहिए।

मोहन मुरलीधर की मूर्ति –

banner पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को मुरली बजाना बहुत ज्यादा प्रिय था। यही कारण है कि उनके भक्त उन्हें मुरलीधर कहते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को कलह और कर्ज ने घेर रखा हो तो उसे अपने घर में भगवान कृष्ण के मुरलीधर स्वरूप की पूजा करनी चाहिए। मान्यता यह भी है कि कान्हा को चांदी की बांसुरी चढ़ाने पर आर्थिक दिक्कतें शीघ्र ही दूर हो जाती हैं।

श्रीराधा संग कृष्ण जी की मूर्ति –

banner हिंदू मान्यता के अनुसार राधा रानी के बगैर भगवान कृष्ण अधूरे माने जाते हैं. मान्यता है कि राधा-कृष्ण की मूर्ति की पूजा करने पर व्यक्ति को सुखी दांपत्य जीवन का सौभाग्य प्राप्त होता है और उनके रिश्ते में आपसी विश्वास और प्रेम हमेशा कायम रहता है।

कान्हा माखनचोर की मूर्ति –

banner भगवान श्रीकृष्ण के माखनचोर स्वरूप की पूजा का भी बहुत ज्यादा पुण्यफल माना गया है। मान्यता है कि द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण बाल-गोपाल के साथ माखनचोरी किया करते थे, जिसमें से वे खाते कम उन्हें खिलाया ज्यादा करते थे। हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण की इस मूर्ति की पूजा करने पर साधक के घर में हमेशा अन्न और धन का भंडार भरा रहता है।

देश में श्री कृष्ण के मुख्य मंदिर और उनकी मान्यता –

द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा –

यह मथुरा का सबसे प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर है. इस मंदिर में भगवान कृष्ण की काले रंग की प्रतिमा को पूजा जाता है. यह मंदिर यमुना नदी के तट पर एक जेल की कोठरी के अंदर स्थित है, जहां पर कभी भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था. मान्यता है कि इसी मंदिर की कोठरी में भगवान कृष्ण का प्राकट्य हुआ था. इस मंदिर को द्वारकाधीश मंदिर भी कहा जाता है. मथुरा में इस दिव्य मंदिर को देखने के लिए प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में लोग आते हैं. इस प्राचीन मंदिर की वास्तुकला देखते बनती है. द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन करके आपको अलग ही सुकून का आभास होगा. banner

द्वारकाधीश मंदिर, गुजरात –

यह मंदिर गुजरात का सबसे फेमस कृष्ण मंदिर माना जाता है. इस मंदिर को जगत मंदिर भी कहते हैं. हिंदू धर्म से जुड़े चार धाम में से एक है गुजरात का यह द्वारकाधीश मंदिर. यह मंदिर तीनों धामों में सबसे सुंदर और पवित्र माना गया है. यह द्वारकाधीश मंदिर गोमती क्रीक पर स्थित है और यह 43 मीटर की ऊंचाई पर बना है. यदि आपने इस मंदिर की यात्रा नहीं की है तो आपकी गुजरात की धार्मिक यात्रा पूरी नहीं मानी जाएगी. जन्माष्टमी के दिन यहां का माहौल देखने लायक होता है. banner

श्री बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन –

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था लेकिन उनका बचपन वृंदावन में ही बीता था. भगवान श्रीकृष्ण को बांके बिहारी भी कहा गया है, इसलिए इस मंदिर का नाम उनके नाम पर ही श्री बांके बिहारी रखा गया था. श्रीकृष्ण ने बचपन में शरारतों और रासलीला सभी वृंदावन में ही की थी. वृंदावन में इस्कॉन मंदिर, प्रेम मंदिर, और बांके बिहारी मंदिर भी दर्शनीय हैं। जन्माष्टमी के मौके पर इन मंदिरों में कान्हा के भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. banner

उडुपी श्री कृष्ण मठ मंदिर, कर्नाटक –

श्री कृष्ण मठ मंदिर, भगवान कान्हा के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. यह मंदिर 13 वीं सदी में वैष्णव संत श्री माधवाचार्य द्वारा स्थापित किया गया था. भक्तों को इस मंदिर की खिड़की के नौ छिद्रो में से ही भगवान श्रीकृष्ण के करने को मिलते हैं. इस खिड़की को चमत्कारी खिड़की कहा जाता है. हर साल यहां भक्तों का तांता लगा रहता है. जन्माष्टमी पर यहां की रौनक देखने लायक है. पूरे मंदिर को फूलों और लाइट्स से सजाया जाता है. भक्तों को दर्शन करने के लिए 3-4 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है. banner

जगन्नाथ पुरी, उड़ीसा –

उड़ीसा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं. जन्माष्टमी से ज्यादा रौनक यहां पर रथ यात्रा के दौरान होती है. यह रथ यात्रा धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस रथ यात्रा में भाग लेने और जगन्नाथ जी के रथ को खींचने के लिए दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस यात्रा के लिए तीन विशाल रथ तैयार किए जाते हैं जिसमें बलराम जी का रथ सबसे आगे, फिर बहन सुभद्रा का रथ और उसके भी भगवान कृष्ण का रथ होता है. banner

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