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Madhya Pradesh

50 साल बाद घर में गूंजी किलकारी, धूमधाम से कराया गया लाड़ली लक्ष्मी का गृह प्रवेश

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भिंड जिले के एक दर्जन युवाओं ने जिले के लोगों की बेटियों के प्रति सोच बदलने का तीन साल पहले बीड़ा उठाया था। इसके लिए उन्होंने कैंप (किरतपुरा एसोसिएशन मैनेजमेंट ऑफ पावर्टी) नाम से संस्था का निर्माण कर बेटियां पैदा होने वाले घरों के लोगों से संपर्क कर ढोल नगाड़ों के साथ और फूलों से घर को सजा कर बेटियों का ग्रह का प्रवेश कराने का कार्यक्रम शुरू किया था। आज कैंप संस्था द्वारा मेहगाँव के चौधरी सुशील शर्मा के घर 50 साल बाद पैदा हुई बिटिया का 60वीं बेटी के रूप में लक्ष्मी की तरह गृह प्रवेश करा कर जिले भर के लोगों की बड़े स्तर पर बेटियों के प्रति सोच परिवर्तन करने का काम किया है।

भिंड में बच्चियों को लेकर बदल रही सोच

दरअसल बीते कुछ सालों पहले तक भिंड जिले में लिंगानुपात में भारी अंतर था। यही अंतर लोगों की सोच में भी दिखायी देता था। शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों की हायर एजुकेशन में काफी कमी थी। जिले के ज्यादा तर लोग प्राइमरी या मिडिल तक पढ़ाने के बाद या तो बेटियों की शादी कर देते थे या फिर से घर पर बैठा लेते थे। कुछ गांवों में तो बेटियों को पैदा होते ही मार दिया जाता था। अब वक्त बदल रहा है आज लोग बेटियां पैदा होने के बाद जश्न मनाने लगे हैं। ऐसा ही जश्न का एक नजारा भिंड जिले के मेहगांव में देखने को मिला। जहां पर मेहगांव निवासी सुशील शर्मा और रागिनी शर्मा को 16 सितम्बर को कन्या रूपी लक्ष्मी घर की नयी सदस्य बनकर उनके जीवन में आयी। रविवार को ग्वालियर के एक निजी अस्पताल से छुट्टी होकर जब लाडली लक्ष्मी घर पहुंची तो कैंप संस्था द्वारा मेहगांव स्थित उनके निवास पर रास्ते में फूल माला, तुलादान,पैरों की छाप आदि कार्यक्रमों को गाजे बाजे के साथ संपन्न कराया गया। यह ऐसा जश्न था जिसे देखने के लिए भी लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

गौरतलब है कि नई लक्ष्मी के दादा चौ प्रदीप शर्मा के मुताबिक़ उनके परिवार में यह कन्या रूपी रत्न 50 साल बाद आया है इस भव्य स्वागत के लिए उन्होंने कैंप के सदस्यों से संपर्क कर उनको अपने यहां आमंत्रित किया। जिसको कैंप संस्था के सदस्य सहर्ष स्वीकार करते हुए भिंड से मेहगांव पहुंचे करीब 3 घंटे की तैयारी और लाडली लक्ष्मी को गाजे बाजे के साथ गृह प्रवेश कराया। इस जश्न को जिसने देखा उसने तारीफ की।

कैंप संस्था तिलक सिंह भदोरिया की कहानी

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केम्प संस्था के प्रमुख तिलक सिंह भदोरिया ने बताया के समाज में  बेटे बेटियों के फर्क ने उन्हें प्रेरणा दी की वे बेटियों के उत्थान के प्रति लोगों को जागरूक करें। उन्होंने यह आयोजन शुरू किया तो धीरे धीरे लोग जुड़े और इस संस्था के सदस्य बन गए। इस तरह के सामाजिक प्रयास से लोगों में बेटियों के प्रति अवश्य ही जागरूकता पैदा होगी, और लोग बेटी को बचाने और शिक्षित करने के लिए आगे आएंगे। सामाजिक स्तर पर संदेश देने की अति आवश्यकता है कि बेटियां बेटों से किसी भी मामले में कम नहीं होती हैं। चाहे वह अंतरिक्ष हो या देश संभालना, कठिन परिस्थितियों और विभिन्न क्षेत्रों में भी बेटियां अपना परचम लहरा रही हैं। लोगों को जरूरत है बेटियों के प्रति जागरूक होने की। कैम्प के सदस्यों ने तो इस आयोजन को नन्ही परी स्वागत महोत्सव नाम दिया है।

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