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Chhattisgarh

रायपुर में डेंगू के बाद अब स्वाइन फ्लू का खतरा, अस्पतालों में नहीं हो रही स्वाइन फ्लू की जांच

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  • बढ़े सर्दी-बुखार और निमोनिया के मरीज
  • लक्षण के आधार पर कराई जा रही जांच
  • कई मरीजों में दिखाई दे रहे स्वाइन फ्लू के भी लक्षण
  • निमोनिया पीड़ित बच्चों की संख्या भी ज्यादा
  • स्वाइन फ्लू की आशंका पर जांच नहीं ,बच्चों पर वायरल का अटैक

रायपुर। शहर में डेंगू के बाद अब बच्चों में सर्दी-बुखार और निमोनिया का खतरा बढ़ रहा है। डेंगू के बाद अब बच्चों में सर्दी-बुखार और निमोनिया का खतरा बढ़ा है। राजधानी में आधा दर्जन सरकारी और 50 से ज्यादा निजी अस्पतालों के ओपीडी में सर्दी-खांसी और वायरल या फिर निमोनिया से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं शहर के आंबेडकर अस्पताल में पिछले डेढ़ महीने से स्वाईन फ्लू की जांच बंद है।

शहर में डेंगू के बाद अब बच्चों में सर्दी-बुखार और निमोनिया के मामले लगातार बढ़े हैं । राजधानी में आधा दर्जन सरकारी और 50 से ज्यादा निजी अस्पतालों के ओपीडी में सर्दी-खांसी और वायरल या फिर निमोनिया से पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं । अभी कोरोना और स्वाईन फ्लू के लक्षण भी इससे मिलते जुलते हैं। ऐसे में अधिक समस्या दिखने पर लक्षण के आधर पर जांच कराई जा रही है । मिली जानकारी के मुताबिक आंबेडकर अस्पताल में पिछले डेढ़ महीने से स्वाईन फ्लू की जांच बंद है। चिकित्सकों ने बताया कि वायरल फीवर के सीजन में कई मरीज ऐसे हैं जिनमें स्वाईन फ्लू के लक्षण नजर आ रहे हैं। लेकिन अस्पताल में जांच की सुविधाएं बंद है । वायरल या निमोनिया पीड़ित बच्चों की संख्या इतनी ज्यादा है कि आईसीयू के एक-एक बेड में दो या ज्यादा बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है।

कोरोना और स्वाईन फ्लू के लक्षण भी इससे मिलते जुलते

वायरल के साथ-साथ बैक्टीरियल निमोनिया के मामले भी आ रहे हैं । इनमें से कुछ बच्चों में निमोनिया के संक्रमण ने फेफड़ों को भी प्रभावित किया है । राहत सिर्फ यही है कि अस्पताल पहुंचने वाले बच्चों की कोरोना जांच हो रही है, लेकिन उनमें कोविड नहीं निकल रहा है । हर दिन ओपीडी में आ रहे बच्चों में से करीब 5 फीसदी बच्चों को भर्ती कराने की नौबत आ रही है। राजधानी के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इस वक्त 250 से अधिक बच्चे भर्ती हैं । रायपुर जिला चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि हर घर में किसी तरह की समस्या है । बच्चों के लिए जागरूक होना चाहिए। उन्होंने बताया कि घर में इलाज न करके तुरंत अस्पताल में लाना चाहिए । अगर बच्चो को निमोनिया हो गया तो ICU की जरूरत पड़ जाती है।

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वायरल के साथ-साथ बैक्टीरियल निमोनिया के मामले

इधर रायपुर में अब तक 415 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है । वर्तमान स्थिति में राजधानी का कोई मोहल्ला नहीं बचा जहां डेंगू की धमक ना हुई हो ,पॉश कॉलोनी के साथ निचली बस्तियों में भी डेंगू के मच्छरों ने लोगों को शिकार बनाया।

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