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Chhattisgarh

भूपेश सरकार केंद्र सरकार के कोयला ब्लॉक आवंटन शुल्क को लेकर पहुंची सुप्रीम कोर्ट

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  • 42 में से 8 कोयला ब्लॉक छत्तीसगढ़ सरकार के अधीन
  • केंद्र कानूनी रूप से 4,169.86 करोड़ का 24 प्रतिशत ब्याज के साथ हस्तांतरित करने के लिए बाध्य
  • सभी कोयला ब्लॉकों को अवैध करार देकर लगाईं रोक – कोर्ट

छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक नया मोर्चा खोल दिया। भूपेश सरकार ने केंद्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की हैंइस याचिका में भूपेश सरकार ने कोयला ब्लॉक आवंटियों द्वारा अतिरिक्त शुक्ल के रूप में रुपये 4,169.86 करोड़ का 24 प्रतिशत ब्याज के साथ दिलाने कीअपील की है । छत्तीसगढ़ कांग्रेस सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के माध्यम से एक मूल मुकदमा दायर किया है। इस अनुच्छेद के माध्यम से किसी भी राज्यको केंद्र के खिलाफ विवाद के मामलों को शीर्ष अदालत में जाने का अधिकार देता है ।

सुप्रीम कोर्ट ने कोयला आवंटन को अवैध माना था

 

25 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में केंद्र सरकार के द्वारा 14 जुलाई 93 से लेकर 31 मार्च 2015 के बीच में किये गए कोयला ब्लॉकों को अवैध और मनमाना मानकर इस आवंटन को रद्द कर दिया था। अदालत ने फैसला सुनाया की यह 31 मार्च से लागू होगा ।

42 ब्लॉकों में से 8 ब्लॉक छत्तीसगढ़ के अधिकार क्षेत्र में आते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामलों के लिए दो विशेष अदालतों का गठन  किया, अरुण भारद्वाज और संजय बंसल विशेष जज नियुक्त किए | Supreme Court ...

 

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 42 कोयला ब्लॉकों के पूर्व-आवंटियों को खनन किए गए कोयले पर अतिरिक्त शुक्ल के रूप में 295 रुपये प्रत्येक टन के हिसाब से भुकतान करने का आदेश दिया था,42 ब्लॉकों में से 8 छत्तीसगढ़ सरकार के अधीन आते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के वकील सुमीर सोढ़ी ने बताया की केंद्र कानूनी रूप से 4,169.86 करोड़ का 24 प्रतिशत ब्याज के साथ हस्तांतरित करने के लिए क़ानूनी रूप से बाध्य है ।

 

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