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3 दिसंबर विश्व विकलांगता दिवस, देश में लगभग 1 करोड़ लोगों को सुनने और देखने की समस्या

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  • विश्व में 15 प्रतिशत दिव्यांग की आबादी है
  • भारत में दिव्यांगों की संख्या 2.68 करोड़
  • विकलांगों के सामने होती हैं कई समस्याएं

 

हर साल विश्व में 3 दिसंबर के दिन अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस मनाया जाता है। इस दिन का मकसद है – दिव्यांगों के प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करना। हर साल इस दिन दिव्यांगों के विकास, उनके कल्याण के लिए योजनाओं, समाज में उन्हें बराबरी के अवसर दिलाने को लेकर गहन विचार – विमर्श किया जाता है।

थीम

इस साल विश्व विकलांग दिवस के लिए थीम ‘Not All Disabilities are Visible’ रखी गई है। यह विकलांगों की समझ और जागरूकता पर ध्यान केन्द्रित करती है। दुनिया की 15 प्रतिशत आबादी दिव्यांग है।

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भारत में विकलांगो की संख्या

भारत में अगर देखा जाए तो 2.68 करोड़ यानी 2.21 प्रतिशत दिव्यांग हैं। ये संख्या ऑस्ट्रेलिया की आबादी के बराबर है। सामाजिक न्याय मंत्रालय का कहना है कि देश में देखने और सुनने की समस्या वाले करीब 1 करोड़ दिव्यांग हैं। आज विश्व विकलांगता दिवस पर देश-दुनिया के हाल पर एक नजर डाली जाए।

 

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विश्व विकलांग दिवस को मनाने का उद्देश्य

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  • इस उत्सव को मनाने का महत्वपूर्ण लक्ष्य विकलांगजनों के अक्षमता के मुद्दे की ओर लोगों को जागरुक करना और समझ को बढ़ाना है।
  • समाज में उनके आत्म-सम्मान, लोक-कल्याण और सुरक्षा की प्राप्ति के लिये विकलांगजनों की सहायता करना।
  • जीवन के सभी पहलुओं में विकलांगजनों के सभी मुद्दे को बताना।
  • इस बात का विश्लेषण करें कि सरकारी संगठन द्वारा सभी नियम और नियामकों का सही से पालन हो रहा है या नहीं।
  • समाज में उनकी भूमिका को बढ़ावा देना और गरीबी घटाना, बराबरी का मौका प्रदान कराना, उचित पुनर्सुधार के साथ उन्हें सहायता देना।
  • उनके स्वास्थ्य, सेहत, शिक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा पर ध्यान केन्द्रित करना।

 

19 करोड़ दिव्यांग की उम्र 15 साल से भी कम

दुनिया में 100 करोड़ से भी ज्यादा दिव्यांग है, जिनमें से लगभग 19 करोड़ दिव्यांगों की उम्र 15 साल या उससे भी कम है। आबादी के हिसाब से देखा जाए तो यह संख्या 3.8 प्रतिशत है।

विकलांगो के सामने आनी वाली समस्याएं

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समाज में इन लोगों के साथ अछूतों सा व्यवहार किया जाता है। शरीर में किसी तरह की अपंगता या किसी भाग का सामान्य से अलग होना अथवा कार्य न करना शारीरिक विकलांगता को दर्शाता है। बहरापन, गूंगापन, अंधापन, लंगड़ाना आदि कुछ ऐसी विकृतियां हैं जिनसे मनुष्य को सामान्य जीवन व्यतीत करने में अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

 

  • दिव्यांगों को स्वास्थ्य देखभाल न मिलने की आशंका ज्यादा।
  • दिव्यांगों से हिंसा की आशंका 10 गुना, जबकि दिव्यांग बच्चों से यौन शोषण 3 गुना अधिक।
  • विकलांगता की समस्या से दो चार हो रहे लोगों के लिए जो न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं सार्वजानिक जगहों पर होनी चाहिए, उसका अभाव लगभग सभी शहरों में है।
  • अस्पताल, शिक्षा संस्थान, पुलिस स्टेशन जैसी जगहों पर भी उनके लिए टॉयलेट या व्हील चेयर नहीं हैं।

 

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