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सिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी डिग्री होना जरुरी नहीं: केंद्र सरकार

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  • दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसीएशन ने उठाया था मुद्दा
  • 6000 असिस्टेंट प्रोफेसरों की होगी नियुक्ति
  • पीएचडी होना अनिवार्य नहीं

केंद्र सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर नौकरी करने के लिए पीएचडी डिग्री की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी के चलते ये फैसला लिया है। जिसकी जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दी उन्होंने कहा कि इस साल असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर होनी वाली भर्ती के
लिए पीएचडी की पात्रता को फिलहाल खत्म किया जा रहा है। बता दें कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अक्टूबर 2021 के अंत तक सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में लगभग 6000 प्रोफेसरों की भर्ती करने की बात कही थी।

दिया था 3 साल का अल्टीमेटम –

आपको बता दें कि यूजीसी यानी विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग ने साल 2018 में यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदकों को साफ दिशा निर्देश दिए थे। कि वह 3 साल के अंदर डिग्री की अनिवार्यता को पूरा कर लें, नहीं तो वह संबधित पोस्ट के लिए अयोग्य माने जाएंगे।

कैंडिडेट्स ने किया था विरोध –

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सरकार के इस फैसले का उस समय कई कैंडिडेट्स ने विरोध किया था। लेकिन केंद्र सरकार ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति के लिए यूजीसी को इस मानदंड को लागू करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद यूजीसी ने 2021-22 एकेडमिक सेशन के लिए पीएचडी कम्प्लीट होना अनिवार्य कर दिया था। हालांकि पिछले साल से कोरोना के चलते कई कैंडिडेट अब तक अपनी पीएचडी पूरी नहीं कर पाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इस साल इन नियमों में राहत देने की मांग की थी। जिसके चलते सरकार ने उनके इस फैसले को मान लिया है।

 

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