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जिग्नेश और कन्हैया कांग्रेस में हुए शामिल, मनीष तिवारी ने उठाए सवाल

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  • राहुल को चाहिए युवाओं का साथ
  • आंदोलन से निकले नेताओं को तरजीह
  • जिग्नेश और कन्हैया हो सकते है शामिल

 

कांग्रेस पार्टी में आज दो युवा चेहरे शामिल होने जा रहे हैं। जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और बिहार के लेफ्ट नेता कन्हैया कुमार और गुजरात से विधायक दलित नेता जिग्नेश मेवाणी कांग्रेस में शामिल होंगे। ये कांग्रेस के लिए राहत वाली खबर है कि कांग्रेस से कई युवा चेहरे किनारा कर चुके हैं। तो ये दो युवा और जाने माने चेहरे कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। कन्हैया और जिग्नेश के कांग्रेस के शामिल होने के साथ ही कांग्रेस पार्टी के अंदर विरोध की आवाजें भी उठने लगी हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद मनीष तिवारी ने दोनों लेफ्ट विचारधारा वाले नेताओं का कांग्रेस में शामिल होने पर विरोध जताया है।

कन्हैया और जिग्नेश के कांग्रेस के बाहर पोस्टर
कन्हैया के कांग्रेस जॉइन करने की काफी लंबे समय से चर्चाएं थी। लेकिन अब जाकर कांग्रेस में कन्हैया की आधिकारिक एंट्री हो रही है। कन्हैया और जिग्नेश की कांग्रेस दफ्तर के बाहर स्वागत में पोस्टर लगाए गए हैं। जिसमें कांग्रेस के वायनाड से सांसद और कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की तस्वीर भी लगी है।

मनीष तिवारी ने जताई नाराजगी

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद मनीष तिवारी ने ट्वीट कर लिखा कि कुछ कम्युनिस्ट नेताओं की कांग्रेस पार्टी में आने की चर्चाएं हो रही है। ऐसे में 1973 में छपी ‘कम्युनिस्ट इन कांग्रेस’ पढ़नी चाहिए, चीजें जितनी बदलती हैं उतनी ही समान लगती हैं।

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कांग्रेस का हाथ युवाओं के साथ

2014 के बाद से लगातार कांग्रेस हार का सामना कर रही है। अब कांग्रेस खुद में बदलाव लाना चाहती है। ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सके। लेकिन कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती लड़खड़ाता संगठन और एक नाकामयाब नेतृत्व है। कांग्रेस के थिंक टैंक ने यह माना है कि पार्टी से युवाओं को जोड़ना होगा। मौका उनको देना होगा जो आंदोलन और संघर्ष निकले हों ताकि उनके जुड़ने से संगठन को नई ताकत मिल सके। कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी आंदोलन से निकले नेता हैं। कांग्रेस पार्टी इसीलिए दोनों नेताओं को साथ लाना चाहती है।

कन्हैया कुमार

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कन्हैया कुमार की राजनीति का केंद्र जेएनयू रहा है। जेएनयू से ही राजनीति के गुण वो सीखे थे। साल 2019 में उन्होंने अपने गृह जिले बेगुसराय से भाजपा के कद्दावर नेता गिरिराज सिंह के खिलाफ चुनाव लड़े थे। जिसमें उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। लेकिन भले ही कन्हैया कुमार बेगुसराय सीट से हार गए हों, लेकिन युवाओं में उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। इसकी वजह है उनके धारधार भाषण जो उनके तर्क से और पेने हो जाते हैं। कांग्रेस पार्टी को बिहार में ऐसे ही एक युवा नेता की जरुरत है। जो बेजान पड़े कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में जान फूंक सके।

जिग्नेश मेवाणी

मेहसाणा जिसे में जन्मे जिग्नेश तेज तर्रार दलित नेता हैं। गुजरात के 2017 के विधानसभा चुनाव में वह पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। जिग्नेश शुरु से ही दलितों के अधिकारों के लिए लड़ते रहे हैं। राष्ट्रिय मीडिया में उनको पहचान ऊना में गोरक्षा के नाम पर दलितों की पिटाई का खिलाफ आंदोलन की अगुवाई करने पर मिली थी। जिग्नेश अपने गृह जिले में आजादी कूच आंदोलन चलाया था। जिसमें उन्होंने 20 हजार दलितों को कि वो मरे हुए जानवर और मेला ना उठाने की शपथ दिलवाई थी। जिग्नेश की पहचान आंदोलन से निकले एक युवा नेता की है। जो दलितों के अधिकार की लड़ाई लड़ता है। गुजरात में कांग्रेस ऐसे ही युवा नेताओं की टीम खड़ी करनी चाहती है।

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