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दक्षिण अफ्रीका में तेजी से फैल रहा कोरोना का नया वैरिएंट, वैज्ञानिक ने जताई चिंता

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  • दक्षिण अफ्रीके में तेजी से बढ़ रहा वैरिएंट ओमीक्रोन
  • नए वैरिएंट से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे वैज्ञानिक
  • दक्षिण अफ्रीका में संक्रमण के 2,828 नए मामले आए

 

दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिक तेज रफ्तार से फैल रहे कोरोना वायरस संक्रमण के नए वैरिएंट ओमीक्रोन से निपटने को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका में ही सबसे पहले कोरोना वायरस के इस बेहद संक्रामक नए स्ट्रेन की पहचान की गई है और अब दूसरे देश भी इससे प्रभावित होते नजर आ रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका में पहले संक्रमण के कम मामले सामने आ रहे थे, लेकिन ओमीक्रोन की उत्पत्ति के बाद से ही दो सप्ताह में नए मामलों में तेजी से वृद्धि देखने को मिली है। वैसे तो देश में अब भी संक्रमण के अपेक्षाकृत कम मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन युवाओं को संक्रमित करने की ओमीक्रोन की रफ्तार देखकर हेल्थ विभाग भी हैरान और परेशान हैं। शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका में संक्रमण के 2,828 नए मामले सामने आए।

20-30 साल के लोग आ रहे इस बीमारी की चपेट में

सोविटोज बरगवनथ अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (ICU) की प्रमुख रूडो मैथिवा ने ऑनलाइन प्रेस वार्ता में कहा, ‘हम कोविड-19 के रोगियों की जनसांख्यिकीय पहचान में एक उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा हैं।’ उन्होंने कहा, ’20 साल से युवाओं से लेकर लगभग 30 साल की आयु तक के लोग मध्यम या गंभीर रूप से इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। कुछ को गहन चिकित्सा की जरूरत है। लगभग 65 प्रतिशत ने टीका नहीं लगवाया और बचे हुए लोगों में से अधिकतर ने केवल एक डोज ही ली है। मैं इस बात को लेकर चिंतित हूं कि जैसे-जैसे मामलों में वृद्धि होगी, जन स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था चरमरा जाएगी।

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उन्होंने कहा कि सार्वजनिक अस्पतालों को गहन चिकित्सा की आवश्यकता वाले रोगियों की संभावित बड़ी आमद से निपटने में सक्षम बनाने के लिए तत्काल तैयारी करने की आवश्यकता है. दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार वृद्धि का अध्ययन करते हुए वैज्ञानिकों ने नए स्वरूप की पहचान की। दैनिक ​​​​परीक्षणों से संकेत मिलता है कि नए मामलों में से 90 प्रतिशत के लिए यह स्वरूप जिम्मेदार है। प्रारंभिक अध्ययनों से पता चलता है कि इसकी प्रजनन दर 2 है – जिसका अर्थ है कि इससे संक्रमित प्रत्येक व्यक्ति के जरिये दो अन्य लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका है।

प्रोफेसर विलेम हेनकॉम ने कहा बड़ी चिंता का विषय

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वहीं अफ्रीका हेल्थ एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर विलेम हेनकॉम ने ‘एसोसिएटिड प्रेस’ से कहा, ‘यह बहुत बड़ी चिंता है। हम सभी इस वायरस को लेकर बहुत चिंतित है। हेनकॉम दक्षिण अफ्रीका कोविड स्वरूप अनुसंधान समूह के सह अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा, ‘यह वैरिएंट मुख्य रूप से ग्वेतेंग प्रांत में केंद्रित है, लेकिन हमें दैनिक ​​परीक्षणों से सुराग मिले हैं। जो बताते हैं कि यह स्वरूप पहले से ही पूरे दक्षिण अफ्रीका में मौजूद है।

वैज्ञानिक और जानकारी हासिल करने में जुटे

टीकाकरण एक महत्वपूर्ण कारक है। ऐसा प्रतीत होता है कि नया स्वरूप उन लोगों में सबसे तेजी से फैल रहा है, जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है। दक्षिण अफ्रीका में फिलहाल लगभग 40 प्रतिशत वयस्क लोगों को ही टीका लगा है, और 20 से 40 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों में यह संख्या बहुत कम है। हेनकॉम ने कहा वैज्ञानिक ओमीक्रोन के बारे में और जानकारी हासिल कर रहे हैं, ऐसे में दक्षिण अफ्रीका के लोगों को चाहिये कि वे अपने बचाव के लिये सभी जरूरी गाइडलाइन का पालन करें।

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