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एमपी के कई नामी कॉलेजों सहित 66 कॉलेज डिफॉल्टर घोषित, MBA, BED, बीपीएड में नहीं दे सकेंगे प्रवेश

By: Sanjay Purohit | Created At: 28 June 2024 08:00 AM


मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर है। प्रदेश के 66 कॉलेजों को डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया है। जो कॉलेज डिफॉल्टर घोषित किए गए हैं वो सभी एमबीए, बीएड और बीपीएड के कॉलेज हैं।

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर है। प्रदेश के 66 कॉलेजों को डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया है। जो कॉलेज डिफॉल्टर घोषित किए गए हैं वो सभी एमबीए, बीएड और बीपीएड के कॉलेज हैं। भोपाल की बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी ने इन कॉलेजों को डिफॉल्टर घोषित करते हुए सूची जारी की है साथ ही ये भी बताया है कि ये सभी डिफॉल्टर कॉलेज छात्रों को अब प्रवेश नहीं दे सकेंगे।

66 कॉलेज डिफॉल्टर घोषित

बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी ने डिफॉल्टर कॉलेजों की सूची जारी करते हुए बताया है कि प्रदेश के 66 ऐसे एमबीए, बीएड और बीपीएड कॉलेज चिन्हित किए गए हैं, जिनके पास मूलभूत ढांचा तक मौजूद नहीं है। इनमें 38 बीएड, बीपीएड और 28 एमबीए कॉलेज शामिल हैं। बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी की आंतरिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक इन कॉलेजों में शिक्षा के मापदंडों की घोर उपेक्षा की जा रही है। निर्धारित शर्तों को भी पूरा नहीं करने पर इन सभी कॉलजों को बीयू ने डिफॉल्टर घोषित किया है। बीयू ने जिन कॉलेजों को डिफॉल्टर घोषित किया है, उसमें भोपाल जिले के कई बड़े समूह के 28 कॉलेज भी शामिल हैं।

स्टूडेंट्स को किया गया सतर्क

जिन कॉलेजों को बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी ने डिफॉल्टर घोषित किया है उनकी सूची उच्च शिक्षा विभाग एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को भी सौंप दी है। जल्द ही यह सूची विश्वविद्यालय के पोर्टल पर भी अपलोड की जाएगी। बीयू ने कॉलेजों में प्रवेश को लेकर छात्रों को सतर्क किया है कि वे इन कॉलेजों में प्रवेश न लें। अब यह कॉलेज सत्र 2024-25 की प्रवेश प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे। वहीं जो कॉलेज प्रवेश दे चुके हैं। ईसी की बैठक के बाद उन छात्रों को दूसरे कॉलेजों में स्थानांनतरित किया जाएगा।

मान्यता और संबंद्धता के लिए दिखाते हैं फैकल्टी

प्रदेश के 275 एमबीए एवं लगभग 650 बीएड कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में यूजीसी के नियमों का सख्ती से पालन नहीं हो रहा। कॉलेजों ने अब तक कोड-28 के तहत फैकल्टी की नियुक्तियां नहीं की है। योग्य फैकल्टी के स्थान पर 10-15 हजार रुपए देकर पीजी स्टूडेंट्स को नियुक्त कर लिया जाता है। वहीं दिखाने के लिए अन्य कॉलेजों में कार्यरत प्रोफेसरों को पंजीकृत कर लिया जाता है।