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गोल्ड के आगे फीका डॉलर! ग्लोबल रिजर्व में घटती जा रही है अमेरिकी करेंसी की हिस्सेदारी

By: Sanjay Purohit | Created At: 01 July 2024 09:12 AM


अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश और सबसे बड़ी इकॉनमी है। उसकी करेंसी डॉलर करीब आठ दशकों से दुनिया का इकॉनमी पर एकछत्र राज करती आई है। आपसी कारोबार के लिए दुनिया डॉलर पर ही निर्भर रहा है लेकिन अब कई देश डॉलर से दूरी बनाना चाहते हैं।

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अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश और सबसे बड़ी इकॉनमी है। उसकी करेंसी डॉलर करीब आठ दशकों से दुनिया का इकॉनमी पर एकछत्र राज करती आई है। आपसी कारोबार के लिए दुनिया डॉलर पर ही निर्भर रहा है लेकिन अब कई देश डॉलर से दूरी बनाना चाहते हैं। यही वजह है कि दुनिया के सेंट्रल बैंक्स के रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी लगातार गिरती जा रही है। फाइनेंशियल ईयर 2024 की चौथी तिमाही में दुनिया के सेंट्रल बैंक्स में डॉलर का शेयर 58.4% रह गया है जो तीसरी तिमाही में 59.2% था। साल 2000 में इसकी हिस्सेदारी 71% थी। हालांकि यह अब भी दूसरे करेंसीज के मुकाबले कहीं आगे हैं। मसलन चीन की करेंसी युआन की हिस्सेदारी चौथी तिमाही में महज 2.3% थी जबकि यूरो की हिस्सेदारी करीब 20% है। दूसरी ओर साल 2023 के अंत में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों के रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी 17.6% पहुंच गई। यह 27 साल में सबसे ज्यादा है।

सोने की हिस्सेदारी बढ़ी

इस बीच साल की पहली तिमाही में दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों ने रेकॉर्ड 290 टन सोना खरीदा। केंद्रीय बैंकों के भारी मात्रा में सोना खरीदने के कारण सोने की कीमत में हाल में काफी तेजी आई है। एक जमाना था जब दुनिया के केंद्रीय बैंकों के रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी 90 फीसदी से ज्यादा थी। साल 1935 तक यह स्थिति रही लेकिन उसके बाद सोने की हिस्सेदारी लगातार घटती गई। 2010 के दशक में यह करीब 13 फीसदी के आसपास रह गया था। लेकिन पिछले कुछ सालों से केंद्रीय बैंक डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं लेकिन सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि डॉलर की गिरती परचेजिंग पावर से बचने के लिए सोना सबसे बेहतर है।