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जल्द हो मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति, हाईकोर्ट ने एमपी सरकार को दिया आदेश

By: Richa Gupta | Created At: 09 February 2024 01:36 PM


मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति न होने से हाईकोर्ट बेहद सख्त नजर आ रहा है। जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी शासकीय और स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में पूर्णकालिक डीन की नियुक्ति हो।

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मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति न होने से हाईकोर्ट बेहद सख्त नजर आ रहा है। जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी शासकीय और स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में पूर्णकालिक डीन की नियुक्ति हो। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने सरकार को यह भी कहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया तीन सप्ताह के भीतर पूरी की जाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन से उक्त आरोपों और डीन की पूर्णकालिक नियुक्ति के संबंध में जवाब पेश करने के लिए कहा है।

नियुक्ति प्रक्रिया रोकने का अधिकार नहीं है

कोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा कि MP मेडिकल एजुकेशन सर्विस रिक्रूटमेंट रूल के तहत प्रभारी डीन को किसी भी तरह की नियुक्ति प्रक्रिया रोकने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि डीन के पद पर प्रभारी रूप से बने रहना और अधिकृत रूप से नियुक्ति में फर्क है। मामले पर सुनवाई के दौरान मेडिकल एजुकेशन विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी की ओर से हलफनामा प्रस्तुत कर बताया गया है कि सभी मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है। शासन की ओर से अंडरटेकिंग दी गई है कि तीन हफ्ते में नए डीन की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

उनका दर्जा एक्टिंग डीन का है

दरअसल, हाईकोर्ट ने सरकार को पिछले साल नोटिस जारी कर पूछा था कि पूर्व निर्देश के बावजूद मेडिकल कॉलेज में पूर्णकालिक डीन की नियुक्ति क्यों नहीं की गई है। सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर के पैथोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार तोतड़े ने याचिका दायर कर कहा था कि वे कॉलेज के सबसे वरिष्ठ प्राध्यापक हैं, इसके बावजूद उनसे कनिष्ठ डॉ. गीता गुईन को प्रभारी डीन बनाया गया है। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर तर्क दिया कि डॉ. गीता कई ऐसे नीतिगत और वैधानिक फैसले ले रही हैं, जो उन्हें सौंपे गए कर्तव्यों की प्रकृति के विपरीत हैं। उनका दर्जा एक्टिंग डीन का है, ऐसे में उन्हें व्यापक प्रभाव वाले नीतिगत और वैधानिक निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन से उक्त आरोपों और डीन की पूर्णकालिक नियुक्ति के संबंध में जवाब पेश करने कहा है।