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लोकसभा चुनाव में क्यों मिली करारी हार, वजह जानने के लिए कांग्रेस करेगी मंथन

By: Ramakant Shukla | Created At: 27 June 2024 02:53 PM


विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के कारण जानने के लिए कांग्रेस भोपाल में दो दिन मंथन करेगी। इसके लिए पार्टी द्वारा पृथ्वीराज चव्हाण की अध्यक्षता में गठित समिति 29 और 30 जून को लोकसभा चुनाव के सभी 27 प्रत्याशी और फिर प्रदेश पदाधिकारियों से चर्चा करेगी। सभी से फीडबैक लेने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट केंद्रीय संगठन को देगी। प्रदेश प्रभारी जितेंद्र सिंह पांच और छह जुलाई को विधायकों के साथ विधानसभा चुनाव के सभी प्रत्याशियों और प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। मध्यप्रदेश में कांग्रेस को जिस तरह से विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, उससे केंद्रीय संगठन भी आश्चर्यचकित है।

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विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के कारण जानने के लिए कांग्रेस भोपाल में दो दिन मंथन करेगी। इसके लिए पार्टी द्वारा पृथ्वीराज चव्हाण की अध्यक्षता में गठित समिति 29 और 30 जून को लोकसभा चुनाव के सभी 27 प्रत्याशी और फिर प्रदेश पदाधिकारियों से चर्चा करेगी। सभी से फीडबैक लेने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट केंद्रीय संगठन को देगी।

29 और 30 जून को सभी प्रत्याशियों को बुलाया गया

प्रदेश प्रभारी जितेंद्र सिंह पांच और छह जुलाई को विधायकों के साथ विधानसभा चुनाव के सभी प्रत्याशियों और प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। मध्यप्रदेश में कांग्रेस को जिस तरह से विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, उससे केंद्रीय संगठन भी आश्चर्यचकित है।

5-6 जुलाई को प्रदेश प्रभारी जितेंद्र सिंह बैठक करेंगे

विधानसभा चुनाव में 1,75,71,582 वोट मिले थे और भाजपा से पार्टी आठ प्रतिशत मतों के अंतर से पीछे रह गई थी। पांच माह बाद लोकसभा चुनाव में 1,23,08,049 वोट ही मिले यानी 53 लाख 63 हजार मत घट गए। इंदौर लोकसभा सीट से अधिकृत प्रत्याशी अक्षय कांति बम ने ऐन वक्त पर नाम वापस ले लिया तो खजुराहो लोकसभा सीट कांग्रेस ने गठबंधन के सहयोगी दल समाजवादी पार्टी के लिए छोड़ दी। यहां प्रत्याशी मीरा यादव का नामांकन निरस्त हो गया। इस प्रकार पार्टी की उपस्थिति 29 में से 27 सीटों में ही रही। इसमें भी कांग्रेस का गढ़ छिंदवाड़ा लोकसभा सीट, जहां पार्टी सभी सात विधानसभा सीटें पिछले दो चुनाव से जीत रही थी, पर भी हार मिली। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के तमाम प्रयास के बाद भी यहां उनके बेटे नकुल नाथ एक लाख से अधिक मतों से चुनाव हार गए।