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नियम कानून ताक पर रखकर स्कूल, कॉलेज के पास ग्रेनाइट कंपनियां कर रहीं खनन

By: Sanjay Purohit | Created At: 24 June 2024 06:57 AM


लवकुशनगर में ग्रेनाइट कंपनी डीजी मिनरल्स वर्ष 2017 से स्कूल-कॉलेज और घने रहवासी इलाके से 200 मीटर से भी कम दूरी में उत्खनन कर रही है।

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छतरपुर, लवकुशनगर में ग्रेनाइट कंपनी डीजी मिनरल्स वर्ष 2017 से स्कूल-कॉलेज और घने रहवासी इलाके से 200 मीटर से भी कम दूरी में उत्खनन कर रही है। ग्रेनाइट कंपनी को डिया (डिस्ट्रिक्ट इनवायरमेंट अस्सिमेंट अथॉरिटी) ने नियम कानून को ताक पर रखकर उत्खनन की अनुमति तब दी थी जब आबादी से 500 मीटर की दूरी तक उत्खनन पर रोक थी, जिसे बाद में 200 मीटर कर दिया गया। इधर हाईकोर्ट के फैसले पर वर्ष 2023 में उत्खनन के लिए सभी अनुमतियां निरस्त कर दी गई। अप्रेल 2024 तक अनुमति का समय दिया गया, लेकिन ग्रेनाइट कंपनी ने अनुमति के लिए आवेदन तक नहीं किया और उत्खनन कार्य धडल्ले से जारी है।

आखिर कैसे मिली अनुमति

डीजी मिनिरल्स को लवकुशनगर के खसरा क्रमांक 593 में लगभग 11.85 हेक्टेयर की ग्रेनाइट खदान तीन हिस्सों में एक ही तारीख में स्वीकृत हुई। लेकिन सबसे बड़ा रहस्य यह है कि कंपनी को डिया की अनुमति कैसे हासिल हो गई। दरअसल डिया की अनुमति के लिए निर्धारित पूर्व नियम के अनुसार खदान से आधा किमी की दूरी तक रिहायशी क्षेत्र, स्कूल, कॉलेज, श्मशान घाट, मंदिर वगैरह नहीं होना चाहिए और नए नियम के अनुसार 200 मीटर तक उत्खनन प्रतिबंधित है। लेकिन इस खदान से 200 मीटर से कम दूरी पर चारों ओर पांच स्कूल कॉलेज, मंदिर, श्मशान घाट व तालाब आदि स्थित हैं।

40 साल पुराने डिग्री कॉलेज व स्कूल

जिस शासकीय खसरा नंबर में 40 साल पुराना डिग्री कॉलेज, गल्र्स व बालक हायरसेंकडरी स्कूल बने हैं, उसी खसरा नबंर में उत्खनन की लीज दे दी गई। इसके अलावा लीज नियमों को दरकिनार करने के साथ ही कंपनी स्वीकृत खदान एरिया के बाहर भी उत्खनन कर रही है। पहाड़ में लगे सैकड़ो की संख्या में हरे भरे वृक्षो को नष्ट कर दिया, लेकिन नियमानुसार एक भी पेड़ नया नही लगाया गया। अब पहाड़ी वीरान नजर आने लगी है।