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INDIA से दो बड़ी पार्टीयों के बेक आउट से क्या बदलेगा लोकसभा का गणित? बिहार में NDA होगा मजबूत

By: payal trivedi | Created At: 29 January 2024 02:52 PM


आम चुनाव की घोषणा से ठीक पहले विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया (INDIA) ब्लॉक में उथल-पुथल है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद बिहार में जेडीयू ने अलायंस से ही नाता तोड़ लिया है और एनडीए का हिस्सा बन गई है।

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New Delhi: आम चुनाव की घोषणा से ठीक पहले विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया (INDIA) ब्लॉक में उथल-पुथल है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद बिहार में जेडीयू ने अलायंस से ही नाता तोड़ लिया है और एनडीए का हिस्सा बन गई है। पंजाब में AAP को लेकर भी कयासबाजी तेज है। कहा जाने लगा है कि आने वाले दिनों में इंडिया ब्लॉक को कुछ और बड़े झटके लगने वाले हैं। फिलहाल, दो बड़ी पार्टियों बंगाल में TMC और बिहार में JDU के INDIA ब्लॉक से एग्जिट होने के बाद लोकसभा सीटों का गणित भी बदल गया है।

ऐसे बना था इंडिया गठबंधन

बता दें कि आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी से मुकाबले के लिए 28 विपक्षी पार्टियों ने मिलकर इंडिया ब्लॉक का गठन किया था। इसके सूत्रधार जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार थे। डेढ़ साल पहले नीतीश ही विपक्ष के तमाम नेताओं से मिलने के लिए उनके राज्यों में गए, वहां गठबंधन की रूपरेखा पर बात की और 23 जून 2023 को पटना में पहली बैठक रखी। उसके बाद बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली में बैठकें आयोजित की गईं। लेकिन, इन बैठकों में ना सीट शेयरिंग का पेंच सुलझ पाया, ना इंडिया ब्लॉक के चेयरपर्सन और ना कन्वीनर के नाम पर सहमति बन सकी। बाद में वर्चुअल मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को चेयरपर्सन घोषित किया गया। वहीं, नीतीश कुमार, संयोजक बनने के लिए तैयार नहीं थे। विपक्षी दलों का प्लान था कि सभी 543 सीटों पर अपने जिताऊ उम्मीदवार उतारे जाएं और 60 फीसदी वोटों को जुटाकर बीजेपी की एनडीए सरकार को सत्ता से हटाया जाए।

24 जनवरी को इंडिया गठबंधन से अलग हो गई ममता बनर्जी

लेकिन, कुछ ही महीने के अंदर हालात यह बने कि पहले ममता बनर्जी ने बंगाल (INDIA) में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। अब नीतीश ने भी इंडिया ब्लॉक का साथ छोड़ दिया है। 24 जनवरी को ममता बनर्जी ने कहा, आगामी लोकसभा चुनाव में TMC बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी। ममता ने जब यह ऐलान किया, तब उनके मन में उपेक्षा का दर्द और तल्खी भी देखने को मिली। ममता का कहना था कि मैंने जो भी सुझाव दिए, वो सभी नकार दिए गए। इन सबके बाद हमने बंगाल में अकेले जाने का फैसला किया। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना यह भी कहा कि वह पश्चिम बंगाल में यात्रा करने जा रहे हैं, इसकी जानकारी शिष्टाचार के नाते भी उनको नहीं दी गई. ये पूरी तरह गलत है। जब भी मैं गठबंधन की बैठकों में हिस्सा लेती हूं तो मुझे लगता है कि वामपंथी कंट्रोल हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्वीकार्य नहीं है। मैं उन लोगों से सहमत नहीं हो सकती, जिनके साथ मैंने 34 वर्षों तक संघर्ष किया है।

घट रही इंडिया ब्लॉक की ताकत

ममता का कहना था कि इस तरह के अपमान के बावजूद मैंने समझौता कर लिया और इंडिया ब्लॉक की बैठकों में हिस्सा लिया है। हालांकि, कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों का कहना है कि ममता को मना लिया जाएगा और मिलकर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन ममता फिलहाल मानने को तैयार नहीं है। ऐसे में अगर ममता 'एकला चलो' की राह पर आगे बढ़ती हैं तो जाहिर तौर पर बंगाल में इंडिया ब्लॉक की ताकत ना सिर्फ घट जाएगी, बल्कि सीटों का बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है और इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिलेगा।

बंगाल में कांग्रेस को दो सीटें ऑफर कर रही ममता

दरअसल, ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को दो सीटें ऑफर कर रही हैं। जबकि कांग्रेस कम से कम सात से दस सीटें दिए जाने की मांग कर रही है। ममता उन सीटों को ही कांग्रेस को देने के लिए तैयार हैं, जो उसने 2019 के आम चुनाव में जीती थीं। बंगाल में कुल 42 सीटें हैं और 2019 में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने 22 सीटों पर जीत हासिल की थी। इंडिया ब्लॉक में शामिल कांग्रेस, लेफ्ट के साथ अगर टीएमसी साथ मिलकर चुनाव लड़ती तो बीजेपी को बड़े नुकसान की आशंका थी। क्योंकि 2019 के चुनाव में बीजेपी ने जिन 18 सीटों पर जीत हासिल की थी, उनमें कई सीटों पर जीत का मार्जिन बेहद कम रहा था। टीएमसी 19 सीटों पर दूसरे नंबर पर थी। एक सीट पर तीसरे नंबर पर आई थी। जबकि बीजेपी 22 सीटों पर दूसरे नंबर पर आई थी। दो सीटों पर तीसरे नंबर पर आई थी। कांग्रेस ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी। एक सीट पर दूसरे और पांच सीट पर तीसरे नंबर पर आई थी। लेफ्ट पार्टियों को ना जीत मिली थी, ना वे दूसरे नंबर की पार्टी बन पाई थी।

'ममता का सिर्फ बंगाल में ही जादू'

ऐसे में अगर टीएमसी, कांग्रेस और लेफ्ट मिलकर चुनाव लड़ती तो बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती थीं। बंगाल में टीएमसी 40 सीटों पर दावेदारी कर रही है। जबकि लेफ्ट के लिए कोई सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। टीएमसी ने झारखंड, ओडिशा, असम, त्रिपुरा, अंडमान निकोबार और बिहार में भी उम्मीदवार उतारे थे। कुल 63 उम्मीदवार चुनाव लड़े। लेकिन बंगाल के अलावा कहीं पार्टी का जादू नहीं चल सका। टीएमसी ने इन राज्यों में बीजेपी और कांग्रेस के वोट बैंक को नुकसान पहुंचाया था, अकेले चुनाव लड़ने से बीजेपी को फायदा होना तय है।

'नीतीश के साथ छोड़ने से इंडिया ब्लॉक पर नई आफत'

इसी तरह, बिहार में जदयू के एनडीए का हिस्सा बनने से इंडिया (INDIA) को सबसे बड़ा झटका लगा है। अलायंस के सूत्रधार के ही साथ छोड़ने से इंडिया ब्लॉक पर नई आफत आ गई है। इससे ना सिर्फ विपक्षी एकता धड़ाम हुई, बल्कि आगामी चुनाव में इंडिया ब्लॉक की संभावनाओं पर भी एक तरह से ग्रहण लग गया है। दरअसल, नीतीश ने ही सामाजिक न्याय के मुद्दे पर बीजेपी को घेरने का फुल प्रूफ प्लान बनाया था। बिहार में पहले जातिगत जनगणना करवाई। उसके बाद नए सिरे से आरक्षण का दायर भी बढ़ाकर नया दांव खेला था। जब यह मुद्दा बना तो एनडीए के सहयोगी दलों ने भी जातीय जनगणना की मांग शुरू कर दी थी। नीतीश के साथ लालू प्रसाद का भी समर्थन था। लेकिन, नीतीश के जाने के बाद लालू यादव भी इंडिया ब्लॉक में अलग-थलग पड़ सकते हैं।

'बिहार में एनडीए होगा मजबूत'

बिहार में कुल 40 सीटें हैं। 2019 में बीजेपी, जदयू और एलजेपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था और 39 सीटों पर जीत हासिल की थी। बीजेपी को 17, जेडीयू को 16 और एलजेपी को 6 सीटों पर जीत मिली थी। सिर्फ किशनगंज में जेडीयू को कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. मोहम्मद जावेद के हाथों हार मिली थी।

'जेडीयू ने 7 अन्य राज्यों में भी उतारे थे उम्मीदवार

जेडीयू ने 18 सीटों पर बिहार और 7 सीटों पर अलग-अलग राज्यों में उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन जीत सिर्फ बिहार में ही मिली, किशनगंज में जेडीयू उम्मीदवार दूसरे नंबर पर आया था। लक्षद्वीप में जेडीयू उम्मीदवार तीसरे नंबर पर आया था। जेडीयू ने लक्षद्वीप, मणिपुर, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर और पंजाब में चुनाव लड़ा था। बिहार, यूपी, पंजाब में सीधे बीजेपी उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाया था।