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जानें कब शुरु हो रही है कावड़ यात्रा? क्या है इसका महत्व

By: Richa Gupta | Created At: 05 July 2024 10:14 AM


पवित्र सावन मास में देवाधिदेव भगवान भोलेनाथ की पूजा, सोमवार व्रत और कांवड़ यात्रा का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। इस महीने में सोमवार के दिन प्रायः सभी प्रसिद्ध शिव मंदिरों की नगरी बोम बम और हर हर महादेव के नारे से गुंजायमान हो जाती है।

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पवित्र सावन मास में देवाधिदेव भगवान भोलेनाथ की पूजा, सोमवार व्रत और कांवड़ यात्रा का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। इस महीने में सोमवार के दिन प्रायः सभी प्रसिद्ध शिव मंदिरों की नगरी बोम बम और हर हर महादेव के नारे से गुंजायमान हो जाती है। साल 2024 में सावन माह की शुरुआत 22 जुलाई से हो रही है। इसलिए भगवान शिव का पहला जलाभिषेक इस दिन ही होगा। इसके लिए कांवड़ यात्रा की शुरुआत शुभ दिन और मुहूर्त में 18 जुलाई से ही शुरू हो जाएगी। पंडितों के मुताबिक लंबी यात्रा करने वालों के लिए आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत का दिन सर्वोत्तम है, ताकि वे सोमवार को बाबा भोलेनाथ को जल अर्पित कर सकें। साल 2024 की आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 जुलाई, 2024 को पड़ रही है। आइए जानते हैं, इस सावन में कांवड़ यात्रा की शुरुआत कब होगी, इसका महत्व क्या है।

कांवड़ क्या है?

बांस की लकड़ी से बने एक डंडे, जिसके दोनों सिरों पर डोरियों के सहारे दो कलश लटके होते हैं, को कांवड़ कहते हैं। इन कलशों में गंगा, नर्मदा, क्षिप्रा जैसी पवित्र नदियों का जल भरा होता है, जिसे कंधे पर ढोकर यात्रा की जाती है। बांस न मिलने पर शुभ लकड़ियों से भी कांवड़ बनाए जाते हैं। कांवड़ को रंग-बिरंगे चमकीले पताकों और फूलों से सजाया जाता है। इस पर भगवान शिव के प्रतीक उनसे संबंधित चीजें, जैसे त्रिशूल, नाग, नंदी बैल और शिवलिंग आदि भी जड़े जाते हैं, जो धातु, लकड़ी या प्लास्टिक के होते हैं।

कांवड़ यात्रा का महत्व

सावन के पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि कांवड़ यात्रा करने से व्यक्ति के सभी पाप और संताप नष्ट हो जाते हैं, रोग और शोक से मुक्ति मिलती है। कांवड़ से ढोकर लाए गए जल के अभिषेक से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं, जिसे जीवन के हर क्षेत्र में बरकत होती है। बता दें कि कांवड़ यात्रा करने वाले शिव भक्तों को ‘कांवड़िया’ कहा जाता है। मान्यता है कि पूरे कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़िया को बहुत पवित्र माना जाता है, जिसका अनादर या अपमान करना पाप माना जाता है। कहते हैं, इस दौरान हर कांवड़िया में भगवान शिव का वास होता है।