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मनोरंजन के बाजार में वायरल संस्कृति का दौर

By: Sanjay Purohit | Created At: 30 June 2024 07:45 AM


सनसनी से खलबली, खलबली से टीआरपी, टीआरपी से एमआरपी और एमआरपी से कमाई- आज के दौर में इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री इसी सूत्र पर कार्य करती दिखाई दे रही है। यूट्यूब और सोशल मीडिया पारंपरिक मीडिया पर हावी हो चुका है।

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सनसनी से खलबली, खलबली से टीआरपी, टीआरपी से एमआरपी और एमआरपी से कमाई- आज के दौर में इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री इसी सूत्र पर कार्य करती दिखाई दे रही है। यूट्यूब और सोशल मीडिया पारंपरिक मीडिया पर हावी हो चुका है। अब ये सोशल मीडिया सलेब्रिटी दे रहा है। बहुत दिन नहीं हुए हैं जब हमारे बीच सलेब्रिटी या तो टीवी के सीरियल से आते थे या उससे भी पहले केवल फिल्मों के अभिनेता ही सलेब्रिटी कहलाते थे। इसके अतिरिक्त कुछ पॉलिटिशियन, बिजनेसमेन, खिलाड़ी, गायक, कलाकार, या कुछ अन्य विशिष्ट योग्यता रखने वाले ही प्रसिद्ध व्यक्तित्व के रूप में उभरते थे। दौर बदला तो कुछ क्राइम की दुनिया के लोग भी प्रसिदि्ध पाने लगे।

इंटरनेट के मोबाइल पर उतर आए जलवे ने सोशल मीडिया टर्म का विकास किया। आज के दौर में हर व्यक्ति के हाथ में उसका मीडिया तंत्र है। इस तंत्र में व्यक्ति चाहे तो दर्शक बन सकता है और चाहे तो मीडियाकर्मी भी। यह दौर वायरल का दौर है। कौन, कब और कैसे वायरल होगा- इसका कोई सैद्धांतिक पक्ष अभी निर्धारित नहीं हो पाया है। पहले लोग जिस फील्ड में प्रसिद्ध होते थे तो उसके लिए बहुत मेहनत करते थे। किंतु आज यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स ने यह मिथक तोड़ दिया है। अब तो कोई कुछ भी कह कर या बेच कर फेमस यानी सलेब्रिटी बन सकता है।

हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बिग बॉस के ओटीटी सीरीज नं.-3 की शुरुआत हुई। यह तो विदित है कि यह शो सलेब्रिटीज के लिए ही है। इसमें प्रसिद्ध शख्सियतों को एक मकान में बंद रखा जाता है। उनकी हर गतिविधि पर सैकड़ों कैमरे नज़र रखते हैं। उनके वास्तविक व्यवहार को ही इस शो का कंटेंट बनाया जाता है। और 24 घंटे इनकी हरकतों व व्यवहार को जनता के सामने परोसा जाता है। इस सब से ही टीआरपी डेवलप की जाती है। बड़े-बड़े कॉर्पोरेट संस्थानों से विज्ञापन ले कर यह शो करोड़ों के वारे-न्यारे करता है। शो में आने वाले सलेब्रिटीज प्रति सप्ताह के अच्छे-खासे बजट पर इसमें शामिल होते हैं। इस बार के शो में भी कुछ विख्यात और तो कुछ कुख्यात शख्सियतों का इसमें जमघट है।

इस शो में आने वाले सलेब्रिटी हमेशा ही विवादों में रहने वाली शख्सियतें होती हैं। इस बार जो सीजन-3 प्रारंभ हुआ है उसके सभी प्रतिभागी किसी न किसी कारण से वायरल हुए लोग ही हैं। अपवाद को छोड़ दें, तो इनमें से ज्यादातर की व्यक्तिगत उपलब्धि इतनी ही है कि ये बहुत कम समय में प्रसिद्ध हो गये या विवादित हो गये। या किसी न किसी कंट्रोवर्सी का हिस्सा बन गये। इसके अतिरिक्त इनमें से अधिकतर की कोई नैतिक भूमिका समाज की कोई दिशा-दशा तय करने में नहीं ही रही।

वैसे तो बिग बॉस का ओटीटी शो हो या प्राइम टाइम में चलने वाला शो जिसके होस्ट सलमान खान रहते हैं- दोनों में ही अकसर कंट्रोवर्सियल व्यक्तियों को शामिल किया जाता है। वजह यह कि उनके झगड़े, तेवर, बेहूदगी, वाहियात व अश्लील हरकतें, फूहड़ बयानबाजी, गाली-गलौज, तू-तड़ाक, अहंकार के टकराव, बड़बोलापन, और जितनी भी बदतमीजियां हो सकती हैं, वही इस शो का मूल कंटेंट होता है, जिसे टीवी या अब ओटीटी के माध्यम से समाज को दिखाया जाता है।

यह शो समाज के हित में तो किसी भी तरह नहीं कहा जा सकता। यूं भी इंटरटेनमेंट मीडिया ने अपना नैतिक जिम्मेदारी का पथ तो कब का छोड़ दिया है। इंटरटेनमेंट के चक्कर में फिल्मी डायलॉग वाला सिद्धांत ही सब मानने लगे हैं कि इंटरटेनमेंट का मतलब है- इंटरटेनमेंट, इंटरटेनमेंट और इंटरटेनमेंट…।

इस बार बिग बॉस के ओटीटी सीजन-3 की होस्टिंग अभिनेता अनिल कपूर कर रहे हैं। शो का जो फॉर्मेट है और जैसा कंटेंट शो को चाहिए होता है -हो हल्ले वाला, गाली-गलौज व लड़ाई-झगड़े वाला- इसके लिए सब मजबूत किरदार घर यानी शो के स्थल में प्रवेश पा चुके हैं।

इंटरनेट के मोबाइल पर उतर आए जलवे ने सोशल मीडिया टर्म का विकास किया। आज के दौर में हर व्यक्ति के हाथ में उसका मीडिया तंत्र है। इस तंत्र में व्यक्ति चाहे तो दर्शक बन सकता है और चाहे तो मीडियाकर्मी भी। यह दौर वायरल का दौर है। कौन, कब और कैसे वायरल होगा- इसका कोई सैद्धांतिक पक्ष अभी निर्धारित नहीं हो पाया है।

हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बिग बॉस के ओटीटी सीरीज नं.-3 की शुरुआत हुई। यह तो विदित है कि यह शो सलेब्रिटीज के लिए ही है। इसमें प्रसिद्ध शख्सियतों को एक मकान में बंद रखा जाता है। उनकी हर गतिविधि पर सैकड़ों कैमरे नज़र रखते हैं। उनके वास्तविक व्यवहार को ही इस शो का कंटेंट बनाया जाता है।

इस शो में आने वाले सलेब्रिटी हमेशा ही विवादों में रहने वाली शख्सियतें होती हैं। इस बार जो सीजन-3 प्रारंभ हुआ है उसके सभी प्रतिभागी किसी न किसी कारण से वायरल हुए लोग ही हैं। अपवाद को छोड़ दें, तो इनमें से ज्यादातर की व्यक्तिगत उपलब्धि इतनी ही है कि ये बहुत कम समय में प्रसिद्ध हो गये या विवादित हो गये। या किसी न किसी कंट्रोवर्सी का हिस्सा बन गये। इसके अतिरिक्त इनमें से अधिकतर की कोई नैतिक भूमिका समाज की कोई दिशा-दशा तय करने में नहीं ही रही।

यह शो समाज के हित में तो किसी भी तरह नहीं कहा जा सकता। यूं भी इंटरटेनमेंट मीडिया ने अपना नैतिक जिम्मेदारी का पथ तो कब का छोड़ दिया है।

समाज को ये किरदार क्या देंगे ऐसे प्रश्न यूं भी आज के दौर में बेबुनियाद लगते हैं। हमारा इंटरटेनमेंट मीडिया तंत्र आदर्श और नैतिक किरदारों को पैदा करने की नीयत से अमूमन कभी कोई शो बनाता ही नहीं है। यहां तो हर किसी को सनसनी फैलानी है। नैतिकता की छाती पर सनसनी और फूहड़ता के कई झंडे गड़ चुके हैं। ‘महंगाई के जमाने में शुद्धता की उम्मीद न रखो’- ये उक्ति मीडिया और इंटरटेनमेंट की मार्केट के बारे में भी प्रकारांतर से इस तरह कही जा सकती है कि इंटरटेनमेंट के दौर में नैतिकता और मानवीय मूल्यों की उम्मीद लगभग बेमानी है।