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जमानत मामले में अरविंद केजरीवाल को फिलहाल नहीं मिली राहत

By: Sanjay Purohit | Created At: 24 June 2024 09:09 AM


जमानत मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री को फिलहाल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ेने केजरीवाल को हाई कोर्ट के खिलाफ दी गई याचिका को वापस लेने के लिए कहा है।

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जमानत मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री को फिलहाल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ेने केजरीवाल को हाई कोर्ट के खिलाफ दी गई याचिका को वापस लेने के लिए कहा है। इस याचिका में केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत पर रोक लगाई गई थी। जस्टिस मनोज मिश्र और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हाई कोर्ट उनकी अर्जी इस कारण से नहीं सुन रहा है क्योंकि इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में पहले से मामला लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुझाव दिया कि पहले हाई कोर्ट से अपनी अर्जी वापस ली जाए, उसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाए।

हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार

सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की जमानती रिहाई के आदेश पर अंतरिम रोक हटाने से इनकार करते हुए कहा कि हमें दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है, तो हमारा दखल देना उचित नहीं है। हम याचिका को बुधवार को सुनवाई के लिए रखेंगे। केजरीवाल के वकील सिंघवी ने कहा कि जब दिल्ली हाई कोर्ट बिना ऑर्डर कॉपी अपलोड हुए स्टे लगा सकता है, तो सुप्रीम कोर्ट भी बिना हाई कोर्ट का आदेश आए उस पर रोक लगा सकता है।

याचिका में केजरीवाल का पक्ष

सीएम केजरीवाल की ओर से दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि जमानत आदेश पर रोक लगाने के लिए हाई कोर्ट का तरीका कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के स्पष्ट आदेश के विपरीत है। याचिका में यह भी कहा गया है कि सिर्फ इसलिए कि याचिकाकर्ता एक राजनीतिक व्यक्ति है और केंद्र सरकार का विरोधी है, यह उसके खिलाफ झूठा मामला बनाने का आधार नहीं हो सकता। इसके साथ ही, यह उसे कानूनी प्रक्रिया से वंचित करने का भी आधार नहीं बन सकता।

हाई कोर्ट इस मामले में कब और क्या फैसला लेगी

याचिका में कहा गया है कि हाई कोर्ट के इस आदेश ने न्याय को चोट पहुंचाई है और याचिकाकर्ता को भी दुख पहुंचाया है। याचिका में आग्रह किया गया है कि इस आदेश को एक पल के लिए भी जारी नहीं रखा जाना चाहिए। अदालत ने बार-बार माना है कि स्वतंत्रता से एक दिन के लिए भी वंचित होना ज्यादती है। सुप्रीम कोर्ट में हुई इस सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं, और देखना होगा कि हाई कोर्ट इस मामले में कब और क्या फैसला सुनाता है।