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गिद्धों को भाती है बुंदेलखंड की आबोहवा, रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भी होगा संरक्षण

By: Sanjay Purohit | Created At: 08 July 2024 10:53 AM


रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में अब गिद्धों के संरक्षण की योजना पर काम शुरू किया गया है। बुंदेलखंड अंचल की आबोहवा गिद्धों को भाती है और यहां प्राकृतिक रहवास के तौर पर विकसित करने की संभावनाये तलाशी जा रही हैं।

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सागर, दमोह तथा नरसिंहपुर जिलों में फैले मध्य प्रदेश के सबसे नए वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिले साल भर भी नहीं हुआ है लेकिन अब यहां बाघों के साथ-साथ अन्य जंतुओं के संरक्षण का काम शुरू किया जा रहा है। अब यहां भारतीय गिद्धों के संरक्षण के लिए विशेष योजना पर काम शुरू किया जा रहा है।

भोपाल के वन विहार पार्क में कैप्टिव ब्रीडिंग के जरिए गिद्धों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। दरअसल, भारतीय गिद्ध एक तरह से विलुप्ति की कगार पर है। पिछले दिनों हुई प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना के परिणामों से उत्साहित वन विभाग कैप्टिव ब्रीडिंग के जरिये गिद्धों के संरक्षण के लिए विशेष कार्य योजना पर काम कर रहा है। इस योजना के तहत वन विहार से तीन जोड़े अवयस्क गिद्धों को नौरादेही टाइगर रिजर्व मैं मोजूद गिद्धों के प्राकृतिक रहवास मैं रखने की योजना है। कुछ समय रखने के बाद इन गिद्धों को खुले वातावरण में छोड़ा जाएगा।

प्राकृतिक सफाईकर्मी

प्राकृतिक सफाईकर्मी माने जाने वाले गिद्ध विलुप्ति की कगार पर है। गिद्धों की कमी का कारण यह रहा है कि किसानों ने मवेशियों का इलाज करने के लिए डाइक्लोफेनाक नामक दवा का उपयोग शुरू कर दिया था। इस दवा से मवेशी और मनुष्यों, दोनों के लिए कोई खतरा नहीं था। जो पक्षी डाइक्लोफेनाक से उपचारित मरे हुए जानवरों को खाते थे, उनके गुर्दे खराब होने लगे और कुछ ही हफ्तों में उनकी मृत्यु होने लगी। गिद्धों की संख्या में कमी होने के कारण मृत पशुओं को जंगली कुत्तों और चूहों ने खाना शुरू कर दिया। ये गिद्धों की तरह पशुओं के शव को पूरी तरह खत्म करने में सक्षम नहीं हैं।