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कैंसर के इलाज में कारगर होगा 'नीलकंठ', एमपी के खेतों में पैदावार और किसान होंगे मालामाल

By: Sanjay Purohit | Created At: 29 January 2024 12:33 PM


सागर में अब औषधीय गुण वाले आलू की पैदावार हो रही है। इनमें नीलकंठ आलू, काला आलू, लाल पहाड़ी आलू, गोल्डन आलू सबसे खास है। नीलकंठ आलू को खाने से कैंसर से निजात मिलती है और काले आलू से आयरन मिलता है। लाल पहाड़ी आलू खाने से शुगर कंट्रोल रहेगी।

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देश के अलग-अलग इलाकों में होने वाले औषधीय गुण वाले आलू की अब सागर में भी पैदावार हो रही है। इनमें नीलकंठ आलू, काला आलू, लाल पहाड़ी आलू, गोल्डन आलू सबसे खास है। नीलकंठ यानी कि बैंगनी रंग के आलू को खाने से कैंसर से निजात मिलती है। इसमें एंटी कैंसर प्रॉपर्टी पाई जाती हैं। देश-दुनिया को मल्टीलेयर फॉर्मिंग की तकनीक से परिचित कराने वाले आकाश चौरसिया ने अपने कपूरिया स्थित मॉडल फॉर्म हाउस में आलू की छह किस्मों को लगाया है। इसमें प्रमुख रूप से नीला आलू (नीलकंठ), ब्लैक आलू और लाल पहाड़ी आलू लगाया है। आकाश बताते हैं कि नीलकंठ आलू में एंटी ऑक्सीडेंट व कैरोटिन एंथोसाइनिन तत्व (एंटी कैंसर प्रॉपर्टी) पाया जाता है। इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सीधे शब्दों में नीलकंठ आलू खाने से व्यक्ति के शरीर में कैंसर व कई अन्य बीमारी से लड़ने की क्षमता विकसित होती है।

किसान बन सकते हैं लखपति, बाजार में 150 रुपए किलो तक रेट

नीलकंठ आलू, काला और लाल आलू सामान्य आलू की तुलना में बाजार में 5 से 7 गुना अधिक रेट तक में बिकता है। एक एकड़ खेत में औसतन 6 से 8 क्विंटल तक बीज लगता है। जबकि 100 से 125 क्विंटल तक उपज होती है। इस लिहाज से सामान्य फसलों की अपेक्षा एक एकड़ में अन आलू से किसान एक सीजन में लाखों की उपज निकाल सकते हैं। मल्टीलेयर सेड में आलू के साथ मैथी, धनिया व अन्य पत्तियों वाली अन्य फसलों को भी वे लगाकर अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं।