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हिमाचल के सेबों से चमकेगी पूर्वांचल की किस्मत!

By: Sanjay Purohit | Created At: 11 July 2024 10:31 AM


हिमाचल प्रदेश के सेबों की कुछ प्रजातियों को उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में लगाया गया और मात्र 2-3 साल बाद ही इनमें फल आ गए।

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पहाड़ों के बीच सेब की होने वाली खेती अब तराई के किसानों के लिए वरदान बन सकती है। गोरखपुर के बेलीपार स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। लगभग 3 साल पहले गोरखपुर के बेलीपार स्थित कृषि विकास केंद्र ने इसका अनूठा प्रयोग किया था। साल 2021 में संस्थान ने हिमाचल प्रदेश से सेब की कुछ प्रजातियां मंगाई गई थीं और खेतों में लगाने के बाद 2023 में इनमें फल आ गए। इस सफल प्रयोग ने किसानों को अपनी ओर आकर्षित किया और एक किसान ने इसकी खेती अपने दम पर शुरू कर दी।

तो पूर्वांचल के किसानों पर भी बरसेंगे पैसे!

संस्थान की सफलता से प्रेरित होकर गोरखपुर के पिपराइच के उनौला गांव के किसान धर्मेंद्र सिंह ने सेबों की खेती का रिस्क लिया। उन्होंने साल 2022 में हिमाचल से सेब के 50 पौधे मंगा खेती शुरू की और अब उनके पौधों में फल भी आ चुके हैं। सेब उत्पादन में मिली सफलता के बाद अब किसान इसकी खेती का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है। कुछ किसानों से बातचीत चल रही है और इस साल एक एकड़ में सेब के बाग लगाने के साथ इसकी शुरुआत करने की तैयारी है। अगर यह प्रयोग आगे भी सफल रहता है तो पूर्वांचल के किसानों पर भी पैसों की बारिश हो सकती है।

जानें, कैसे करनी होगी सेब के पेड़ों की रोपाई

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसपी सिंह ने कहा, ‘अन्ना, हरमन-99, डोरसेट गोल्डन में से ही पौधों का चयन करें। बाग में कम से कम 2 प्रजातियां के पौधों का रोपण करें जिससे कि अच्छा परागण हो। इससे फलों की संख्या अच्छी आएगी। चार-चार के गुच्छे में फल आएंगे। फलों की अच्छी साइज के लिए शुरुआत में ही कुछ फलों को निकाल दें। नवंबर से फरवरी रोपड़ का उचित समय है। लाइन से लाइन और पौध से पौध की दूरी 10 गुणा 12 फीट रखें। प्रति एकड़ लगभग 400 पौधे का रोपण करें। रोपाई के 3 से 4 वर्ष में ही 80 फीसद पौधों में फल आने शुरू हो जाते हैं।