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AIIMS Bhopal में दुर्लभ और जटिल जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित तीन बच्चों को मिला नया जीवन

By: payal trivedi | Created At: 28 March 2024 04:22 PM


एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर डॉ. अजय सिंह के मार्गदर्शन में पहली बार बाल रोगियों में दुर्लभ और जटिल जन्मजात हृदय की बीमारी को बिना ऑपरेशन किये नीतिनोल डिवाइस के द्वारा ठीक किया गया।

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Bhopal: एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर डॉ. अजय सिंह के मार्गदर्शन में पहली बार बाल रोगियों में दुर्लभ और जटिल जन्मजात हृदय की बीमारी को बिना ऑपरेशन किये नीतिनोल डिवाइस के द्वारा ठीक किया गया। पहले मामले में 1 साल की बच्ची जिसका वजन केवल 6 किलोग्राम था उसे सांस लेने में दिक्कत होती थी, दूध पी नहीं पाती थी और वजन घटने के साथ छाती में खिंचाव की समस्या भी हो रही थी । 2 डी इकोकार्डियोग्राफी जाँच में पता चला कि उसे एक दुर्लभ जन्मजात हृदय दोष एओर्टोपल्मोनरी विंडो (0.1 से 0.6% सीएचडी) है। एपी विंडो में हृदय की दो बड़ी वाहिकाओं के बीच एक छेद होता है । ह्रदय के इस छेद को यदि समय रहते बंद नहीं किया गया तो मरीज का जीवन खतरे में पड़ जाता है । इसमें मरीज की कमर से एक नस के द्वारा नितिनोल डिवाइस जैसे बटन को ह्रदय तक पहुंचा कर उस छिद्र को बंद किया गया। मामले की जटिलता को देखते हुए धमनी का प्रयोग नहीं किया गया। अब बच्ची पूर्णतया स्वस्थ है।

दूसरे मामले में 12 किलोग्राम वजन वाले 3 वर्षीय लड़के में 25 मिमी आकार के बड़े ओस्टियम सेकेंडम एट्रियल सेप्टल दोष का निदान किया गया था, जिसे सर्जिकल क्लोजर के लिए एक अन्य अस्पताल से एम्स भेजा गया था। किन्तु यहां पर कार्डियोलॉजी डाक्टरों की टीम ने जाँच के पश्चात् बिना ऑपरेशन किये इसे ठीक करने का निर्णय लिया और इसे परक्यूटेनियस ट्रांसकैथेटर डिवाइस क्लोजर के लिए उपयुक्त पाया। इस मामले में बच्चे को 28 मिमी बटन जैसे नाइटिनोल डिवाइस के साथ सफलतापूर्वक प्रबंधित किया गया और बच्चे की सर्जरी करने की आवश्यकता नहीं पड़ी ।

तीसरे मामले में, एक 12 वर्षीय लड़के को सांस लेने में तकलीफ और पल्स ऑक्सीमीटर पर ऑक्सीजन की उपस्थिति केवल 60-65% ही पायी गयी । बबल कंट्रास्ट 2डी इकोकार्डियोग्राफी से मरीज की जाँच करने पर पता चला कि मरीज फेफड़े के एवी विकृति (धमनियों और नसों के बीच एक असामान्य संबंध ) से पीड़ित थ। इसलिए विकृति को पर्क्यूटेनियस रूप से बंद करने की योजना बनाने के लिए एक प्रीऑपरेटिव सीटी एंजियोग्राफी की गई और इसे वैस्कुलर प्लग डिवाइस लगाकर बिना चीर-फाड़ के दिल का इलाज किया गया । प्रक्रिया के बाद ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़कर 95% तक सामान्य हो गई ।

ये सभी जटिल पर्क्यूटेनियस बाल चिकित्सा के केस एम्स भोपाल की कार्डियोलॉजी टीम डॉ. भूषण शाह के नेतृत्व में डॉ. अंबर कुमार, डॉ. किसलय श्रीवास्तव और डॉ. मधुर जैन के साथ कार्डियक एनेस्थीसिया टीम डॉ. वैशाली वेंडेस्कर और डॉ. एस आर ए एन भूषणम पडाला के सहयोग से सीटीवीएस टीम डॉ. योगेश निवारिया और डॉ. एम किसान द्वारा प्रबंधित किए गए । यह पहली बार है कि एम्स भोपाल बाल रोगियों में इस तरह के जटिल मामलों को सफलतापूर्वक ठीक कर रहा है। कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) अजय सिंह ने नई चुनौतियों का सामना करने और सर्वोत्तम रोगी देखभाल के लिए पूरी टीम को बधाई दी है ।

संवाददाता- उत्सव गुप्ता