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सुप्रीम कोर्ट का पूर्व सांसद आनंद मोहन को निर्देश- "पासपोर्ट जमा करें और हर पखवाड़े थाने में लगाएं हाजिरी"

By: Sanjay Purohit | Created At: 08 February 2024 01:40 PM


आनंद मोहन को 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

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पटनाः उच्चतम न्यायालय ने हत्या के मामले में दोषी लोकसभा के पूर्व सदस्य आनंद मोहन को अपना पासपोर्ट जमा करने और हर पखवाड़े स्थानीय थाने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का मंगलवार को निर्देश दिया। पिछले साल बिहार सरकार ने आनंद मोहन को सजा में छूट दी थी। इसके साथ ही, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने आनंद मोहन को दी गई छूट पर अपना हलफनामा दाखिल करने का केंद्र को आखिरी मौका दिया। आनंद मोहन को 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। पीठ ने आदेश दिया, "प्रतिवादी (आनंद मोहन) को अपना पासपोर्ट तुरंत स्थानीय थाने में जमा करना चाहिए और हर पखवाड़े थाने में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए।" संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने पीठ से कहा कि यह मामला खिंच रहा है, क्योंकि केंद्र ने सजा माफी को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पिछले साल मई में ही केंद्र को नोटिस जारी किया गया था और सरकार अब भी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांग रही है।

27 फरवरी को अंतिम सुनवाई करेगी पीठ

लूथरा ने बिहार सरकार के हलफनामे का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक विचित्र मामला है, क्योंकि दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, लेकिन समय से पहले रिहा कर दिया गया और अब वह राजनीतिक भूमिका निभा रहा है। पीठ ने कहा कि वह 27 फरवरी को मामले में अंतिम सुनवाई करेगी और दलीलें पूरी करने के लिए दोनों पक्षों को अधिकतम 60 मिनट का समय मिलेगा। आनंद मोहन के वकील ने पीठ से पासपोर्ट जमा करने और थाने में उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। पीठ ने कहा कि उसने अन्य मामलों में प्रतिवादी (आनंद मोहन) की संलिप्तता को देखते हुए यह आदेश पारित किया है। पीठ ने केंद्र के वकील से एक सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करने को कहा।