H

आज मनाया जा रहा है हरछठ का व्रत, जानें इसका महत्व

By: Richa Gupta | Created At: 05 September 2023 04:48 AM


भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला हरछठ (हलषष्ठी) व्रत आज सोमवार 4 सितंबर को मनाया जा रहा है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।

bannerAds Img
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला हरछठ (हलषष्ठी) व्रत आज सोमवार 4 सितंबर को मनाया जा रहा है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। बलरामजी का प्रधान शस्त्र हल तथा मूसल है, इसलिए उन्हें हलधर भी कहा जाता है, इसी वजह से इस पर्व को ‘हलषष्ठी’ या ‘हरछठ’ कहते हैं। इस दिन विशेष रूप से हल की पूजा करने और महुए की दातून करने की परंपरा है। महिलाएं इस दिन अपनी संतान की दीर्घायु और उसके स्वस्थ्य जीवन की कामना के लिए व्रत रखकर पूजन आदि करती हैं। इस व्रत में विशेष रूप से गाय के दूध और उससे तैयार दही का प्रयोग वर्जित है। हरछठ को देश के कई स्थानों पर अलग-अलग नाम से जाना जाता है कहीं पर इसे हरछठ या फिर हलषष्ठी भी कहते हैं।

हरछठ व्रत विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान व ध्यान से निवृत होकर गोबर लाएं और उसे जमीन पर लेपकर छोटा सा तालाब बना लें। इसमें झरबेरी, ताश, गूलर, पलाश की एक एक शाखा बांधकर बनाई हरछठ को गाड़ दें और तालाब में जल भर दें। इसके बाद तालाब में वरुण देव की पूजा अर्चना करें। साथ ही इस दिन भगवान गणेश, माता पार्वती के साथ छठ माता की भी पूजा की जाती है। पूजा में सतनाजा यानी सात तरह के अनाज (चना, जौ, गेहूं, धान, अरहर, मक्का और मूंग) चढ़ाने के बाद हरी कजरिया, होली की राख, धूल, भुने हुए चने के होरहा तथा जौ की बालें चढ़ाएं। पूजा स्थल पर बच्चों के खिलौना रखें और जल से भरा कलश भी रखें। हरछठ के पास ही श्रृंगार का सामान, हल्दी से रंगा कपड़ा और आभूषण भी रखें। पूजन में भैंस का दूध और दही का ही उपयोग करें। इसके बाद सभी की पूजा अर्चना करें और कथा सुनें।

पूजा विधि

हलछट पूजा में भगवान शिव व माता पर्वती की मूर्ति बनाकर पूजा महिलाओं द्वारा की जाती है। पूजा आदि में केवल भैंस के दूध का उपयोग करने की परंपरा है। इस दिन भैंस के दूध से बने घी और दही का उपयोग पूजन आदि में किया जाता है। इस पर्व पर महुवा, आम, पलास की पत्ती, कांसी के फूल, नारियल, मिठाई, रोली-अक्षत, फल, फूल सहित अन्य पूजन सामग्री से विधि-विधान से पूजन करने का विधान है। शास्त्रों में संतान की रक्षा के लिए माताओं द्वारा यह व्रत करना श्रेष्ठ बताया गया है।