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Madhya Pradesh

तालाबों के शहर के तालाब ही गंदे

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  • तालाबों से है शहर की पहचान
  • तालाबों में ही मिल रहा सीवेज का पानी
  • 3 साल में सीवेज नेटवर्क पर 298 करोड़ रुपये हुए खर्च

 

भोपाल। शहर को ताल -तलैयों का शहर कहा जाता है। लेकिन यहां के ऐतिहासिक तालाब अब सीवेज के कारण गंदे हो रहे हैं। भोपाल के मोतिया तालाब की बात की जाए तो इसके आसपास बने मकान और तालाब किनारे बने शौचालय का मल मूत्र तालाब में मिल रहा है। जिससे तालाब प्रदूषित हो रहे हैं। पिछले 3 सालों में नगर निगम ने सीवेज नेटवर्क पर 298 करोड रुपए की राशि खर्च की है। जिसका भुगतान भी हो गया है। यह जानकारी पिछली विधानसभा में भी दी गई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नजर नहीं आ रहा है। मोतिया तालाब की एक तस्वीर सामने आई है। जिसमें देखा जा सकता है कि तालाब में कचरा रोकने के लिए  जो लोहे की जालियां लगाई गई थी वह जालियां भी टूट कर हट चुकी है। यहा सीवेज का गंदा पानी और कचरा तालाब में मिल रहा है। लेकिन कोई भी अधिकारी सुध लेने वाला नहीं है। भोपाल की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब की स्थिति भी कुछ इसी तरह की है। सीवेज का पानी चेंबर के ऊपर से ओवरफ्लो होकर बड़े तालाब में मिल रहा है। वहीं छोटे तालाब की बात की जाए तो यहां पर भी बाढ़ गंगा नाले का गंदा पानी और कचरा तलाब में मिल रहा है।आइए अब आपको भोपाल सीवेज नेटवर्क पर पिछले 3 साल में खर्च की गई राशि के भुगतान का कुछ आंकड़ा दिखाते हैं।

 

पिछले 3 साल में भोपाल सीवेज पर खर्च की गई राशि

वित्तीय वर्ष 2018-19 में राशि रु 52.45 करोड

वर्ष 2019-20 में राशि रु 103.56 करोड

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वर्ष 2020-21 में राशि रु 123.22 करोड

वर्ष 2021-22 में राशि रु 17.11 करोड़

इसके साथ ही कुल राशि 296.34 करोड़ मय जीएसटी का भुगतान हुआ है।

 

कांग्रेस ने बीजेपी पर किया बार

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तालाबों में सीवेज का पानी मिलने को लेकर पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा का कहना है कि यह निगम का भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा कि गुजरात की कंपनियों को मकान बनाने, कचरा उठाने और सीवेज को साफ करने का काम दिया गया है। इसके लिए उन्हें 296 करोड़ का भुगतान भी किया गया है। इसके बाबजूद भी सीवेज का पानी तालाबों में मिल रहा है। उन्होंने कहा कि तालाबों की ऐसी स्थिती होने पर सालों से जो अधिकारी निगम में बैठे हैं उनको हटाना चाहिए।

नगरी प्रशासन मंत्री ने अधिकारियों को ठहराया दोषी

प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह का कहना है कि करोड़ों रुपए की राशि खर्च करने के बाद भी सीवेज के कारण भोपाल के तालाब सुरक्षित नहीं है। जो कहीं ना कहीं अधिकारियों की मिलीभगत से कंपनियों को फायदा पहुंचाने का मकसद दिखाता है। उन्होंने कहा कि हम मामले की जांच कराएंगे और जो भी अधिकारी दोषी  है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

राशि का भुगतान घोटाले का इशारा

सीवेज नेटवर्क पर करोड़ों रुपए की राशि का खर्च होना और जमीनी स्तर पर काम का न होना कहीं न कहीं अधिकारियों पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। साथ ही 296 करोड़ों रुपए की राशि का भुगतान होना किसी घोटाले की तरफ भी इशारा कर रहा है।

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