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विपक्ष ने कांग्रेस पर बोला हमला, वोटों के लिए 3 महीने तक दलित को बनाया सीएम, किया दलितों का अपमान

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  • कांग्रेस ने खेला दलित दांव
  • अकाली दल ने उठाए सवाल
  • विपक्ष ने कहा – किया दलितों का अपमान

 

पंजाब के नए मुख्यमंत्री के तौर पर चरणजीत सिंह चन्नी ने शपथ ली है। और इसी के साथ लंबे समय से पंजाब में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पंजाब प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच की तकरार का अब खात्मा हो गया है। कांग्रेस चरणसिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर दलित कार्ड खेलती हुई दिखाई दे रही है। कांग्रेस की तरफ से कहा जा रहा है कि पहली बार पंजाब में किसी दलित मुख्यमंत्री ने शपथ ली है। लेकिन कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत के बयान ने विपक्ष को बैठे बिठाए कांग्रेस पर हमला करने का मुद्दा दे दिया। हरीश रावत ने कहा कि विधानसभा चुनाव में पार्टी का चेहरा नवजोत सिंह सिद्धू होंगे। इसी बयान को आधार बनाकर विपक्ष ने सवाल किया है कि अगर चुनाव सिद्धू के चेहरे पर लड़ना है तो आखिर चन्नी को 3 महीने मुख्यमंत्री बनाकर दलितों का अपमान क्यों किया है।

कांग्रेस को चन्नी के चेहरे पर भरोसा नहीं

अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कांग्रेस के फैसले पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस 3 महीने के लिए चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर दलितों का वोट हासिल करना चाहती है। और कांग्रेस 3 महीने बाद विधानसभा चुनाव नवजोत सिंह सिद्धू को चेहरा बनाकर लड़ेगी। इससे साफ साबित होता है कि कांग्रेस का विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री का चेहरा सिद्धू होने वाले हैं। यानि चन्नी के चेहरे पर कांग्रेस को खुद भरोसा नहीं है।

सिरसा ने आगे कहा कि मुझे ऐसा लग रहा था कि चन्नी सीएम पद की लेकर दलितों का अपमान नहीं करेंगे। लेकिन उन्होंने शपथ लेकर यह दलितों को यह बता दिया कि उनको दलितों के सम्मान से ज्यादा अपनी कुर्सी की परवाह है।

कांग्रेस के कदम से अकाली-बसपा गठबंधन को चुनौती

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अकाली दल कांग्रेस के इस फैसले पर लगातार हमलावर है और इसको दलितों के अपमान के तौर पर दिखाने की कोशिश कर रही है। इसकी पीछे एक वजह है कि कांग्रेस के चरण सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर दलित वोटों पर सीधा निशाना साधा है। यह माना जा रहा है कि इस फैसले से कांग्रेस को दलित वोट मिलने की उम्मीद है। अकाली दल को यही परेशान कर रहा है क्योंकि दलित वोटों को अपनी तरफ करने के लिए ही उसने बसपा से गठबंधन किया है। अकाली कांग्रेस के इस कदम को अपने लिए चुनौती के तरह देख रहा है। इसीलिए कांग्रेस के इस कदम को दलितों का अपमान बताकर, दलित वोटों को साधने की कोशिश कर रही है।

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