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ओवैसी करेंगे ‘वंचित शोषित सम्मेलन’

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी जगह तकाश रहे ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए जुट गए हैं। मुस्लिम वोटरों के दम पर उत्तर प्रदेश की सियासत में अपना वजूद बनाने की कोशिश कर रहे ओवैसी ने मंगलवार को प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव से मिले तो अपने वोटबैंक को मजबूत करने के लिए को वो ‘वंचित शोषित सम्मेलन’ करने जा रहे हैं।

ओवैसी करेंगे ‘वंचित शोषित सम्मेलन’

ओवैसी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बिहार की तरह बड़ा सियासी बड़ा राजनीति करिश्मा दिखाने की कवायद में लगे हुए हैं। ओवैसी की ये महत्वकांक्षा अकेला उनका कोर वोटर मुस्लिम नहीं कर सकता। इसलिये ओवैसी मुस्लिम के साथ दलित और अति-पिछड़े को भी अपने साथ में लाने की तैयारी कर रहे हैं। ओवैसी ने इसके लिए योजना बना ली है। वह आज से वंचित शोषित सम्मेलन’ का शुभारंभ करने जा रहे हैं। ओवैसी इस सम्मेलन की बुधवार से शुरुआत करेंगे।

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वंचित शोषित सम्मेलन के जरिये अल्पसंख्यक को जोड़ने की योजना

ओवैसी की राजनीति का आधार मुस्लिम (अल्पसंख्यक) समाज है। ओवैसी इसी समाज को जोड़ने के लोए वंचित शोषित सम्मेलन करेंगे। यह सम्मेलन प्रदेश भर में किया जाएगा। बुधवार को संबल तो 25 सितंबर को प्रयागराज, 26 सितंबर को कानपुर, 30 सितंबर बहराइच के नानपारा और 10 अक्टूबर को अतरौली में वंचित शोषित सम्मेलन किया जाएगा। ओवैसी पूरे उत्तर प्रदेश का दौरा कर पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम करेंगे।

सूबे में अल्पसंख्यक वोटों को जोड़ने के लिए असदुद्दीन ओवैसी संभल में ‘वंचित शोषित सम्मेलन’ को संबोधित करेंगे. इसके अलावा 25 सिंतबर को प्रयागराज, 26 सितंबर को कानपुर, 30 सितंबर को बहराइच के नानपारा और अगले 10 अक्तूबर को उतरौली में शोषित वंचित सम्मेलन करेंगे और साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग जिलों में बैठक कर उन्हें जीत का मंत्र देंगे. ओवैसी की पार्टी ही नहीं बल्कि भागीदारी संकल्प मोर्चे के घटक दल और कार्यकर्ता भी ‘शोषित वंचित सम्मेलन’ की तैयारी में जुट गए हैं.

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ओवैसी की शिवपाल से मुलाकात का सियासी गणित

ओवैसी यह बखूबी जानते हैं कि अगर उनको इस लायक बनना है कि वो दिल्ली पर दबाव डाल सकें, तो उनको उत्तर प्रदेश में अपना सियासी वजूद हासिल करना होगा। ओवैसी को यह पता है कि यह अकेले संभव नहीं है। इसीलिए वो शिवपाल से मिलकर, उनको साथ लाने की कवायद में जुटे हैं। शिवपाल की पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एटा, मैनपुरी, इटावा, जसवंत नगर और अन्य सीटों पर यादव समाज पर अच्छी पकड़ है। यह उन्होंने 2017 के चुनाव में सपा को चोट पहुँचाकर दिख दिया था। ओवैसी मंझे हुए नेता हैं, उन्हें पता है कि शिवपाल का मिलना यानी कि लगभग 9 फीसदी यादव वोटों का ओवैसी के पास आना। और जब 9 फीसदी यादव वोट 20 फीसदी मुस्लिम से जुड़ जाता है तो 29 फीसदी का जादुई आंकड़ा बनता है। ये ही है, ओवैसी का शिवपाल से मिलने के पीछे का गणित।

ओवैसी की रावण पर भी नजर

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भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण का पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुज्जफरनगर, बागपत, हाथरस, अलीगढ़ और अन्य जगहों पर दलितों में अच्छी पकड़ है। दलित आज जाटव (11%) गैर जाटव (9%) में बटा हुआ दिखता है, लेकिन चंद्रशेखर काशीराम की तरह दलितों की बात कर पुरे समाज पर पकड़ बनाने की कोशिश में हैं। ओवैसी दलित, शोषित, वंचित की बात कर चंद्रशेखर को अपने साथ जोड़कर और मजबूत होना चाहते हैं।

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