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पीएम मोदी ने बिना नाम लिए विपक्ष पर साधा निशान, सेलेक्टिव अप्रोच को लोकतंत्र के लिए बताया खतरा

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  • पीएम मोदी ने साधा विपक्ष पर निशाना
  • सेलेक्टिव अप्रोच देश के लिए खतरा
  • पीएम ने ऐसे लोगों से सावधान रहने को कहा

 

दिल्ली। एनएचआरसी के 28वें स्थापना दिवस पर बोल रहे प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि देश में कुछ ताकतें ऐसी है कि उन्हें एक जगह मानवाधिकार का हनन दिखता है तो दूसरी जगह मानवाधिकार पर एक रहस्यमयी चुप्पी साधे रखते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि यह सेलेक्टिव अप्रोच लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है। पीएम मोदी का यह निशाना विपक्ष की लखीमपुर खीरी पर की जा रही राजनीति को लेकर समझा जा रहा है।

भारत ने दुनिया को अहिंसा का रास्ता सुझाया- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, “जब पूरी दुनिया विश्व युद्ध की हिंसा में लिप्त थी, भारत ही था जिसने पूरे विश्व को ‘अधिकार और अहिंसा’ का रास्ता दिखाया था। हमारे बापू को पूरा विश्व मानव के अधिकारों और मानव के मूल्यों के प्रतीक के रूप में देखता है।” पीएम मोदी ने कहा, “भारत ने जिस तरह आजादी के लिए हिंसा का रास्ता ना चुनकर अहिंसा के रास्ते आजादी को प्राप्त किया वह हमारे लिए मानवाधिकारों की प्रेरणा का, मानवाधिकार के मूल्यों का बहुत बड़ा स्रोत है।

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अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के अधिकारों को सुनिश्चित किया- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कि यह सरकार मानव अधिकारों को ध्यान रखने की मूल भावना के साथ काम कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि “भारत आज ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र आगे बढ़ने के लिए प्रयास कर रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि “मैंने 15 अगस्त को देश से बात करते हुए, इस बात पर जोर दिया है कि अब हमें सरकार के रूप में जनता की मूलभूत सुविधाओं को शत-प्रतिशत तक पूरा करना है। इससे समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के अधिकारों को ताकत मिलेगी।”

देश ने अलग-अलग स्तर पर हो रहे अन्याय को दूर किया- पीएम मोदी

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पीएम मोदी ने आगे कहा कि ‘’हमारी सरकार बनी हमनें सबसे पहले अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की शुरुआत की थी। इसी कड़ी में जब गांव का गरीब आदमी या महिला खुले में शौच जाने को मजबूर थी, उस गरीब को जब भारत सरकार से शौचालय मिलता है, तो उसे गौरव की अनुभूति होती है। जिस गरीब ने कभी बैंक नहीं देखा था। जो कभी बैंक के अंदर जाने की सोच भी भी नहीं पाता था, उस गरीब का जब जनधन अकाउंट खुलता है, तो उसके अंदर हौसला आता है, उसका गौरव बढ़ता है। देश में दशकों से एक प्रथा समाज के अंदर फैली हुई थी। उस कुप्रथा को तीन तलाक कहा जाता था। दशकों से मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक नाम की कुप्रथा के खिलाफ कानून की मांग कर रही थीं। हमने ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून बनाकर, मुस्लिम महिलाओं को नया अधिकार दिया है.’’

 

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