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71 साल के हुए पीएम मोदी, तस्वीरों में देखिए शून्य से शिखर तक का सफर

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  • आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन
  • 71 साल के हुए पीएम मोदी
  • देखिए मोदी के जीवन की अनदेखी तस्वीरें

1950 में गुजरात के वडनगर में साधारण से परिवार में जन्में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 71 साल के हो गए है। कुछ दशकों पहले कहां किसी ने सोचा था कि एक चायवाला एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा। आज पीएम की लोकप्रियता सिर्फ देश तक सीमित नहीं है। विश्वभर में उन्हें भारत का मजबूत प्रतिनिधित्व करने वाले लीडर के रूप में देखा जाता है। अपने राजनीतिक सफर में वो एक ऐसी शख्सियत के रूप में उभरे, जो कभी आलोचनाओं से नहीं घबराएं। यही वजह रही कि प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हैं।

यूं तो पीएम के बचपन से संघ के प्रति झुकाव और चायवाले से लेकर प्रधानमंत्री तक के सफर की कहानी सभी ने सुन रखी है। लेकिन इस बार हम आपको मोदी के जीवन के कुछ अनछुए किस्से तस्वीरों के जरीए दिखाएंगे। जिसमें आप, कभी सैनिक बनने की इच्छा में NCC ज्वाइन करने वाले, तो कभी सरदार का रूप धारण करने वाले मोदी से मिल सकेंगे।

NCC की ड्रेस में मोदी

अपने स्कूल के दिनों में नरेंद्र मोदी NCC के कैडेट थे। इस बारें में उन्होंने खुद 2015 में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करके बताया था। साथ ही मन की बात में भी एक बार इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बचपन में सैनिक बनना उनका सपना था। जिसके चलते वो जामनगर के सैनिक स्कूल में दाखिला लेना चाहते थे, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से ऐसा नहीं हो पाया।

संघ के पहले गुरू का साथ मोदी की तस्वीर

वैसे तो मोदी का बचपन से संघ को प्रति झुकाव रहा, लेकिन 60 के दशक के आखिरी सालों में मोदी RSS से जुड़े। इस दौरान स्थायी सदस्यता लेकर वो अहमदाबाद के मणिनगर इलाके में संघ के क्षेत्रीय मुख्यालय में रहने लगे। जहां उन्होंने प्रांत प्रचारक लक्ष्मणराव ईमानदार के सहायक के रूप में काम किया। फिर 1972 में अपनी काबिलियत के बल पर प्रचारक बनाए गए। जहां से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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आडवाणी के साथ मोदी की पुरानी तस्वीर

1986 में लालकृषण आडवाणी की नजर मोदी पर गई। इस दौरन आडवाणी भाजपा के अध्यक्ष थे। उन्होंने ही मोदी की पार्टी ने एंट्री कराई। जिसके बाद 1987 में मोदी को गुजरात में भाजपा के संगठन मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।

सरदार के रूप में मोदी

1975 की इमरजेंसी नरेंद्र मोदी के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई। दरअसल इमरजेंसी ने ही उन्हें लालकृष्ण आडवाणी का करीबी बनने का मौका दिया। इस दौरान खिंचवाई मोदी की एक तस्वीर काफी चर्चित है। जिसमें वो पगड़ीधारी सिख के रूप में दिख रहे हैं।

रेडियो के जरिए संवाद करते मोदी

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मोदी हमेशा से ही मीडिया की ताकत को बखूबी पहचानते थे। अपनी बातों को मीडिया के जरिए सीधे लोगों तक पहुंचाना उसकी खासियत बनी। राजनीतिक करियर के शुरुआत से ही वो अक्सर रेडियो के जरिए लोगों से संवाद करते थे। वर्तमान में इसी तरह के संवाद हमें ‘मन की बात’ के रूप में सुनने को मिल रहे हैं।

पूर्व सीएम केशुभाई पटेल के साथ मोदी

गुजरात की राजनीति में मोदी को लाने के पीछे केशुभाई पटेल को बड़ा हाथ माना जाता है। केशुभाई गुजरात के पूर्व सीएम थे, इस दौरान उनके करीब रहते हुए मोदी ने गुजरात की सत्ता को समझा। हालांकि 2001 में उन्हें हटाकर भाजपा ने को मोदी को सीएम बनाने का निर्णय लिया।

गुजरात के सीएम के रूप में मोदी

गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान विपक्ष लगातार नरेन्द्र मोदी की आलोचनाएं और दुष्प्रचार करता रहा। लेकिन मोदी देश की जनता के दिलों में अपनी जगह बनाते रहे। इसी का नतीजा रहा कि देश के इतिहास में पहली बार किसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाने का फैसला पार्टी ने नहीं किया, बल्कि जनता ने लिया।

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देश के प्रधानमंत्री के रूप में मोदी

यह मोदी के विकास कार्यों और सुशासन स्थापित करने के नतीजा है कि वो आज प्रधानमंत्री के रूप में 7 साल 113 दिन पूरे कर रहें हैं। उसके नेतृत्व में अनेकों योजनाएं को सफलतापूर्ण चल रहीं हैं। जिसने देश की छवि को ही बदलकर रख दिया है।

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