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Spiritual

आज है द्वितीय तिथि श्राद्ध, जानिए तर्पण का सही विधि-विधान

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  • आज है श्राद्ध पक्ष का दूसरा दिन
  • द्वितीय तिथि श्राद्ध का क्या है महत्व?
  • तर्पण का सही विधि-विधान

हिंदू धर्म में पितृपक्ष एक विशेष समय है। श्राद्ध पक्ष किसी भी व्यक्ति की कुंडली से संतान श्राप, पिृत दोष या ग्रह दोष से मुक्ति दिलाने के लिए श्रेष्ठ उपाय है। इन दिनों पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी जाती है। साथ ही पूजा, हवन और ब्राह्मण भोज कराया जाता है। मार्कंडेय पुराण शास्त्र के अनुसार श्राद्ध से पूर्वज संतुष्ट होते हैं और परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य, धन और सुख प्रदान करते हैं।

पितृ पक्ष भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक के काल को कहा जाता है। जिसके अनुसार इस साल 20 सितंबर से शुरू हुआ पितृ पक्ष 6 अक्टूबर तक रहेगा। आज यानि 22 सितंबर को श्राद्ध की दूसरी तिथि है। पितृ पक्ष के हर दिन का आपना विशेष महत्तव है। आइए जानते हैं दूसरी तिथि के महत्तव के बारे में।

द्वितीय तिथि श्राद्ध का महत्व

द्वितीय तिथि श्राद्ध को द्वितीया श्राद्ध या दूज श्राद्ध भी कहा जाता है। यह हिंदू चंद्र महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष दोनों का दूसरा दिन है। इसलिए आज इन दोनों पक्षों में मृत्यु को प्राप्त हुए लोगों की श्राद्ध की जाती है।

तर्पण का विधि-विधान

– श्राद्ध करने से पहले स्नान कर साफ कपड़े पहने।
– तर्पण के दौरान दरभा घास की अंगूठी पहनना न भूलें।
– अनुष्ठान के दौरान पवित्र धागे को कई बार बदलें।
– भगवान विष्णु और यम की पूजा करें।
– कौवे, कुत्ते और चीटियों को पहले भोजन दें।
– ब्राह्मणों को भोजन अवश्य कराएं।

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