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दलित युवक की हत्या के बाद क्या खाली होगा सिंघु बॉर्डर, जानिए किसान आंदोलन से जुड़े विवाद

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कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठन पिछले एक साल से आंदोलन पर बैठे हैं। सरकार से कई दौर की बातचीत के बाद भी कोई हल नहीं निकल पाया है। किसान संगठन जिद पर बैठे हैं कि जब तक कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाता तब तक दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसान नहीं उठेंगे। कल (शुक्रवार) यानि 15 अक्टूबर को पंजाब के दलित युवक लखबीर सिंह (किसान) की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई। दलित युवक लखबीर सिंह की हत्या करके उनकी लाश को सिंघु बॉर्डर पर लगी पुलिस बैरीकेड पर टांग दिया था। इस हत्या के बाद एक बार फिर किसान आंदोलन विवादों में घिर चुका है। इस घटना के बाद एक बार फिर किसान संगठनों के कब्जे से दिल्ली बॉर्डर को खाली करवाने की मांग उठ चुकी है। दलित युवक की हत्या के मामले में बड़े वकील शंशाक शेखर झा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है। उन्होंने अपनी याचिका में सिंघु बॉर्डर खाली करवाने और अपनी याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की है।

किसान आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने किसान संगठनों के आंदोलन पर ही सवाल उठा दिया था। उन्होंने कहा था कि जब कानून के लागू होने पर रोक लगा दी गई है तो फिर किस बात पर आंदोलन किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन की वजह से दिल्ली-एनसीआर में जाम की समस्या होने से सुप्रीम कोर्ट ने किसान संगठनों पर तल्ख टिप्पणी की थी।

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टीकरी बॉर्डर पर बंगाल की युवती से दुष्कर्म

कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली-हरियाणा के बॉर्डर पर बैठे किसान संगठनों के पक्ष में अपना समर्थन देने बंगाल से आई युवती के टीकरी बॉर्डर पर सामुहिक बलात्कार किया गया। यह घटना कुछ महीने पहले हुई थी। किसान आंदोलन से जुड़े संगठनों ने इस घटना पर अपनी सफाई भी दी थी लेकिन यह घटना ने किसान आंदोलन पर एक कलंक लगा दिया।

बॉर्डर इलाके से गायब हैं डेढ़ दर्जन लड़कियां

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किसान आंदोलन में दिल्ली के बॉर्डर के आस-पास के इलाके से करीब डेढ़ दर्जन लड़कियां गायब हैं। पुलिस ने कई मामलों में रिपोर्ट दर्ज की है लेकिन पुलिस उन्ही आरोपियों को पकड़ पाती है, जिनको खुद आंदोलनकारियों ने सौंपा है। आस-पास के लोग अब डर चुके हैं कि अपनी महिलाओं को किसान आंदोलन के क्षेत्र में जाने से भी रोक रहे हैं।

दिल्ली हरियाणा बॉर्डर शख्स को जिंदा जला दिया

दिल्ली के पास हरियाणा के बहादुरगढ़ इलाके में किसान आंदोलन से जुड़े लोगों ने एक व्यक्ति को जिंदा आग में झोंक दिया था। पीड़ित मुकेश को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। 90 फीसद तक जल चुके मुकेश ने जिला अस्पताल में आखिरी सांस ली। गांव के लोगों ने किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुकेश को इन लोगों ने काफी परेशान किया था। जिसके बाद मुकेश के परिवार वालों ने उनका शव लेने तक से मना कर दिया था।

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पुलिस पर किया हमला

यह घटना जून महीने की जिसमें किसान आंदोलन की जगह का फोटो खींचने पर आंदोलनकारियों में से कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। गौरतलब है कि हमले में पीड़ित स्पेशल ब्रांच के दो असिस्टेंड सब-इंस्पेक्टरों थे। यह मामला 10 जून का है, जिसमें नरेला थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में आरोप निहंगो पर लगा है।

लाल किले पर उपद्रव

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किसान आंदोलन पर सबसे बड़ा धब्बा लाल किले पर हिंसा का है। गणतंत्र दिवस पर ट्रेक्टर परेड के समय किसानों ने हिंसा की सारी सीमाएं लांघ दी थी। किसानों ने लाल किले पर पहुंच कर तिरंगा हटाकर और दूसरे झंडे लगा दिए थे। इस हमले में कई पुलिस कर्मी घायल हुए थे।

दलित युवक की बेरहमी से हत्या

किसान आंदोलन का सबसे ताजा विवाद शुक्रवार यानि 15 अक्टूबर को जुड़ा है। पुलिस ने जांच में पाया है कि मृतक दलित युवक के शरीर में 14 घाव हैं। मृतक को तड़पा कर के मारा गया था। उसके शरीर पर तलवार और भाले के निशान मिले थे। पुलिस ने अज्ञात निहंगो पर मामला दर्ज किया है। जिसमें से एक निहंग ने खुद आत्मसमर्पण कर दिया है। लखबीर सिंह की मौत बेहद दर्दनाक थी, उनको उनकी अंतिम सांस तक तड़पाया गया था। दलित लखबीर सिंह को मारकर फिर उनके हाथ काट दिया गया था। उसके बाद उनके शरीर को सिंघु बॉर्डर पर बैरीकेड पर लटका दिया था।

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