


सुप्रीम कोर्ट ने मोटर व्हीकल टैक्स पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि मोटर वाहन टैक्स सार्वजनिक जगहों और इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल के लिए लगाया जाता है, वह तब नहीं लगाया जा सकता जब तक कोई वाहन उनका इस्तेमाल न करे।
जस्टिस मनोज मिश्रा और उज्ज्वल भुयान की बेंच ने आरआईएनएल की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि मोटर व्हीकल टैक्स एक तरह का मुआवजा है। मोटर वाहन टैक्स लगाने का कारण यह है कि जो लोग सड़कों और हाईवे जैसे सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इसके लिए भुगतान करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने एक्ट पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश मोटर व्हीकल टैक्सेशन एक्ट की व्याख्या करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा, इस अधिनियम की धारा 3 कहती है कि सरकार समय-समय पर यह निर्देश दे सकती है कि राज्य में सार्वजनिक जगह पर इस्तेमाल होने वाले या रखे जाने वाले हर मोटर वाहन पर टैक्स लगाया जाएगा।
प्राइवेट जगहों पर वाहन के इस्तेमाल पर नहीं देना होगा टैक्स
बेंच ने कहा कि धारा 3 के तहत टैक्स तभी लगेगा जब कोई वाहन राज्य में सार्वजनिक जगह पर इस्तेमाल हो या इस्तेमाल के लिए रखा जाए। इसलिए, टैक्स वाहन के इस्तेमाल या सार्वजनिक जगह पर इस्तेमाल करने के इरादे पर है। यदि कोई वाहन वास्तव में सार्वजनिक जगह पर इस्तेमाल होता है या इस तरह से रखा जाता है कि उसका सार्वजनिक जगह पर इस्तेमाल करने का इरादा है, तो टैक्स देना होगा।