


अमेरिकी टैरिफ के सामने भारत और जापान का गम एक सामान ही है। जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ से भारत की इकोनॉमी को गहरा नुकसान होगा, ठीक उसी तरह जापान की अर्थव्यवस्था को भी। प्रधानमत्री मोदी के टोक्यो पहुंचने से पहले ही जापान ने ट्रंप को सख्त संदेश देते हुए अपने व्यापार वार्ताकारों को अमेरिका जाने से रोक दिया। जापान के व्यापार वार्ताकार रयोसेई अकाजावा ने गुरुवार को आखिरी समय में अपना अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है। जिसके बाद जापान और अमेरिका के संबंध भी भारत-अमेरिका की ही तरह खराब होने की आशंका है और सबसे पहला तलवार जिसपर गिरने की आशंका है, वो QUAD है, जिसके भारत और जापान दोनों सदस्य हैं।
जापान के वार्ताकारों के अमेरिका दौरा रद्द करने से जापान द्वारा अमेरिका को दिए जाने वाले 550 अरब डॉलर के निवेश पैकेज पर खतरा मंडरा गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार में रियायत देने के बदले जापान पर अमेरिका में 550 अरब डॉलर का निवेश करने के लिए कहा था। ऐसे में अब क्वाड के भविष्य पर गंभीर खतरा है, जिसे इंडो-पैसिफिक में चीन को बैलेंस करने के लिए बनाया गया था। पिछले कम से कम 5 सालों में क्वाड के दर्जनों बैठक हुए, जिसमें इंडो-पैसिफिक में चीन के वर्चस्व को कम करने के लिए कई फ्रेमवर्क डिजाइन किए गये हैं, लेकिन अब उन सभी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने क्वाड को कर दिया बर्बाद?
QUAD में भारत, जापान और अमेरिका के बाद चौथा सदस्य ऑस्ट्रेलिया है, जिसने भी डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए गये सख्त टैरिफ के बाद चीन से दोस्ती कर ली है। पिछले महीने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने चीन की यात्रा की थी और दोनों देशों ने सुलह कर ली। ऑस्ट्रेलिया, जो पहले से ही चीन पर अपने कारोबार के लिए काफी निर्भर रहा है वो अमेरिका के भारी-भरकम टैरिफ के बीच बिना चीन से सुलह किए अपनी अर्थव्यवस्था को नहीं बचा सकता था। इसके अलावा भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद जापान के बाद चीन की यात्रा करेंगे। इसी महीने चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दिल्ली में मोदी से मुलाकात की थी और अब शंघाई सहयोग संगठन यानि SCO की बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, मोदी और पुतिन का व्यक्तिगत स्वागत करेंगे।