


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को जापान दौरे के बाद सीधे चीन पहुंचे। यह दौरा खास इसलिए है क्योंकि यह जून 2020 की गलवान झड़प के बाद पीएम मोदी का पहला चीन दौरा है। तियानजिन शहर में हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच 50 मिनट की बातचीत हुई। पीएम मोदी ने कहा, "पिछले साल कजान में हमारी चर्चा बेहद उपयोगी रही, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में सुधार हुआ। सीमा पर तनाव कम हुआ है, कैलाश मानसरोवर यात्रा और उड़ानें दोबारा शुरू हुई हैं।
जिनपिंग का बयान: "ड्रैगन और हाथी साथ आएं
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मुलाकात को सकारात्मक बताया और कहा, "ड्रैगन (चीन) और हाथी (भारत) को साथ आना चाहिए।" उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग से एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया को लाभ मिलने की बात कही। मोदी ने कहा कि भारत और चीन मिलकर काम करें तो लगभग 2.8 अरब लोगों को फायदा हो सकता है। उन्होंने आपसी सम्मान और विश्वास के आधार पर रिश्तों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
गलवान संघर्ष के बाद पहला बड़ा डिप्लोमैटिक कदम
जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी बिगड़ गए थे। अब यह मुलाकात दोनों देशों के बीच संवाद बहाली और तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। मोदी ने बातचीत में बताया कि सीमा विवाद को सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनी है। इससे शांति और स्थिरता का माहौल बन रहा है।
पीएम मोदी तियानजिन में हो रही शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भी भाग लेंगे। यह SCO की अब तक की सबसे बड़ी समिट मानी जा रही है, जिसमें 20 से अधिक देश शामिल हो रहे हैं। सोमवार को मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे।