


मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति स्वदेशी की भावना पर आधारित है और आज भी भारतीय तकनीक वैश्विक स्तर पर छाई हुई है। उन्होंने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और भारतीय तकनीक के महत्व पर जोर दिया।
स्वदेशी का महत्व: एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण
भोपाल में आयोजित स्वदेशी से स्वावलंबन संगोष्ठी में मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति की चर्चा करते हुए कहा - हमारी संस्कृति हमेशा स्वदेशी की भावना पर आधारित रही है। पहले, गांवों में ही सभी आवश्यक वस्तुएं मिल जाती थीं। आज भी भारतीय तकनीक और उत्पादों की वैश्विक स्तर पर धूम है उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हर देश यह समझ रहा है कि इस दौर में स्वदेशी की भावना ही सबसे आवश्यक है, और यही भाव आने वाले समय में भारत को आर्थिक दृष्टि से और सशक्त बनाएगा।
स्वदेशी उत्पादों का उपयोग: देश के विकास की दिशा
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अपने कर्तव्यों को समझते हुए स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करें और इसके प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता अभियान चलाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जनसंचार के माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए इस भावना को और अधिक मजबूत किया जाएगा।
हमारी सरकार ने भी यह प्रयास किया है कि स्वदेशी आंदोलन को मजबूत किया जाए। हमें स्वदेशी से समृद्धि की ओर बढ़ना है, और इसके लिए हमें खुद से शुरुआत करनी होगी, डॉ. यादव ने कहा।
आर्थिक समृद्धि में स्वदेशी की भूमिका
मुख्यमंत्री ने भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत का उल्लेख करते हुए कहा - आज जब हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने की ओर बढ़ रहे हैं, तो यह स्वदेशी उत्पादों की मानसिकता और हमारी जीवनशैली का परिणाम है।
उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण के तौर पर कहा कि स्वदेशी आंदोलन का एक प्रमुख हिस्सा बाल गंगाधर तिलक द्वारा गणेशोत्सव की शुरुआत थी, जो स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बना। उनका कहना था कि स्वदेशी की भावना में हर दौर में चुनौती आई, लेकिन समय ने उसे सशक्त बना दिया।
धार्मिक और पर्यटन के क्षेत्र में राज्य सरकार के प्रयास
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा धार्मिक और वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों की चर्चा भी की। उन्होंने महाकाल मंदिर की बात करते हुए कहा, 1235 में जब हम कमजोर थे, तो महाकाल का मंदिर तोड़ दिया गया था। मगर जब हमारी शक्ति बढ़ी, तो ढाई सौ साल बाद वह पुनः बनवाया गया।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले साल अकेले उज्जैन में 7 करोड़ लोग आए, जो राज्य के पर्यटन क्षेत्र की वृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा, राज्य सरकार अपने जंगलों को जानवरों से आबाद करने के प्रयासों में जुटी है।